रचनात्मक सकारात्मकता vs विध्वंसक नकारात्मकता - MeenaSamaj Social Help Group

Tribal News

शनिवार, 2 नवंबर 2019

रचनात्मक सकारात्मकता vs विध्वंसक नकारात्मकता


साथियों! समाज में सदैव दो विचारधाराओं का द्वंद चलता रहता है। एक विचारधारा है- रचनात्मक सकारात्मकता और दूसरी विचारधारा है- विध्वंसक नकारात्मकता। 
रचनात्मक सकारात्मकता की विचारधारा पारस्परिक सहयोग और पारस्परिक समृद्धि पर आधारित है; जिसमें समाज का एक व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को आगे बढ़ने में सकारात्मक सहयोग करता है और अपनी रचनात्मकता और इन्नोवेशन के माध्यम से दूसरे व्यक्तियों के जीवन को बेहतर बनाने में विश्वास करता है।  यह विचारधारा इस विश्वास पर आधारित है कि किसी भी व्यक्ति का विकास, सुख समृद्धि और उन्नति समाज के विकास और समृद्धि पर निर्भर करती है।  व्यक्ति कभी भी सुखी और समृद्ध नहीं हो सकता यदि समाज दुखी और पिछड़ा हुआ है। किसी भी समाज की उन्नति और विकास इस बात पर निर्भर करता है कि समाज के कितने व्यक्ति विकास में सहभागी बनते हैं और आगे बढ़ते हैं।
विध्वंसक नकारात्मकता  की विचारधारा एक व्यक्ति का शोषण कर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति पर आधारित होती है।  इस विचारधारा के अंतर्गत एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकता है और वह अपनी उन्नति और समृद्धि पर ध्यान न देकर दूसरे व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकने में अपनी उर्जा लगाता है।यह विचारधारा इस विश्वास पर आधारित है कि मेरी उन्नति और समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि मैं दूसरे व्यक्ति को आगे बढ़ने से किस हद तक रोक पाता हूं। 
समाज की इस द्वंद्वात्मक स्थिति में यह व्यक्ति की पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा, संस्कार और आसपास के वातावरण पर निर्भर करता है कि वह  किस विचारधारा को जीवन में चुनता है। इसके अतिरिक्त व्यक्ति जीवन में उसको किस प्रकार के गुरुओं, मित्रों और सहयोगियों का साथ का मिलता है जिनसे प्रभावित होकर वह कभी भी एक विचारधारा से दूसरी विचारधारा पर जा सकता है। 
सामान्यतया सकारात्मक व्यक्ति यही कहते हुए मिलते हैं कि “हमें अपनी लाइन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए; न की दूसरी व्यक्ति की लाइन छोटी करने पर।”  मेरा मानना है की व्यक्ति को स्वविवेक से निर्णय करना चाहिए कि उसका भला किस विचारधारा में है। उसके परिवार और उसके समाज का भला किस विचारधारा में है। व्यक्ति को यह निर्णय करते समय दीर्घकालिक परिणामों के विषय में गंभीरतापूर्वक विचार करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कभी-कभी अल्पकालिक परिणाम व्यक्ति को नकारात्मक दृष्टिकोण की ओर आकर्षित करते हैं। जब व्यक्ति गंभीरता से सोचता है तो उसको यह भली-भांति समझ में आता है कि रचनात्मक सकारात्मक द्वारा ही सभ्यताएं और संस्कृतियों आगे बढ़ी हैं और व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन में उन्नति और समृद्धि के रास्ते खुले हैं। 
 दोस्तों आप भी अपने स्वविवेक से निर्णय करिए और अपना रास्ता स्वयं सुनिए क्योंकि खुद से अच्छा गुरु और स्वयं से अच्छा मार्गदर्शक कोई नहीं हो सकता।
 जय हिंद
डॉ सत्यपाल सिंह मीना,  सोच बदलो गांव बदलो टीम।

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