मीना सुधार आंदोलन के अध्यक्ष पूजनीय #गणपतराम बगरानिया जी - MeenaSamaj Social Help Group

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शनिवार, 2 नवंबर 2019

मीना सुधार आंदोलन के अध्यक्ष पूजनीय #गणपतराम बगरानिया जी

कृपया पूरा पढ़ें।
  मीना सुधार आंदोलन के अध्यक्ष पूजनीय #गणपतराम #बगरानिया  जी के  स्वतंत्रता सेनानी स्व श्री #लक्ष्मी #नारायण #झरवाल जी के बारे में विचार ।
        महामना की 106 वी जयंती पर दंडवत नमन
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सन्न 2008 में परमपूज्य श्री गणपतराम जी बगराणिया के जीवन से सबंधित जानकारी जुटाने के लिए जयपुर गया । इसी दौरान में आदरणीय लक्ष्मीनारायण जी झरवाल को ढूंढते हुए सांगानेरी गेट स्थित काली माता मंदिर पहुंचा , यहां एक महिला से आदरणीय का नाम लेकर पूछा तो उसने कहा " ये खड़या छः न " में तो देखता ही रह गया जबरदस्त ऊंचा कद , हाथ ने चीटिया सिर पर नेहरू टोपी ओर अपनी चिर परिचित वेशभूषा में शानदार व्यक्तित्व को में अपनी आँखों से देख रहा था । में झरवाल जी के नजदीक जाकर कहा कि में रामसिंह नरहड़ से आया हु , उनको थोड़ा ऊंचा सुनता था इसलिए शायद मेरा नाम तो उन्हें नही सुना लेकिन गांव का नाम सुन गया था ओर बोले कि " गणपतराम जी के वंशज छो के " मेने हा कहा , तो उन्होंने मुझे अपने सीने से लगाया ओर भाव विभोर हो गए । फिर मुझे अपने साथ अपने ऑफिस में ले गए वहां बहुत सारी सामग्री , अनमोल दस्तावेज ,दुर्लभ फ़ोटो दिखाई । बाद में अपने घर ले गए वहां मुझे पूरे स्वतन्त्रता आंदोलन , मीणा आंदोलन , जरायमपेशा के खिलाफ आंदोलन की कहानि सुनाई । बीच बीच मे जब भी परमपूज्य गणपतराम जी का नाम लेते तो उनकी आंखें नम हो जाती । इसी समय उन्होंने मुझे अपने द्वारा लिखा गया मीणा इतिहास दिया । 
झरवाल साहब युवा पीढ़ी द्वारा नशे की लत से काफी विचलित रहते थे उन्होंने मुझे बताया कि गुटखा खाने से कैंसर हो जाता हैं , बीड़ी सिगरेट पीने से आंखे ओर फेफड़े खराब हो जाते है , शराब तो घर और जीवन दोनों को बर्बाद कर देती हैं ।
आदरणीय ने स्वतंत्रता संग्राम , जरायमपेशा कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी , आरक्षण के लिए संघर्ष कर प्राप्त किया ।आदरणीय झरवाल साहब की प्रंशसा में क्या लिखूं कोई शब्द ही नही हैं , जितना लिखा जाए उतना ही कम है लेकिन में एक बात तो कह सकता हु की हम लोग आज जो भी हैं उनकी बदौलत है , आज अगर मीणा कॉम का नाम जीवित हैं तो झरवाल साहब के कारण ही हैं । 
अपने अंत समय मे वे बीमार हो गए थे तब में फरवरी में उनसे मिलने गया था हालांकि बात तो नही की लेकिन पहचान गए और हाथ जोड़कर अभिवादन किया । 
मीणा सरदारों हमारी जाती एहसान फरामोश बहुत ज्यादा है झरवाल साहब के निधन के बाद दाह संस्कार में  एक भी मीणा विधायक , सांसद या नेता नही गया यहाँ तक कि तीये की बैठक में भी कोई नही गया । इससे हम किस बात का अंदाजा लगा सकते हैं जिस महापुरुष ने जिंदगी में कभी भेदभाव नही किया जिसने भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी उसी एक मात्र मीणा समाज के स्वंत्रता सेनानी की तीये की बैठक में किसी भी नेता का  न जाना हमारी किस मानसिकता को दर्शाता हैं । उनके तो अंतिम शब्द भी " एक हो एक हो " था । 
आज बड़ा सुकून मिला कि युवा पीढ़ी ने अपना इतिहास जाना और आज राजस्थान भर में सक्रिय युवाओ द्वारा झरवाल साहब की जयंती मनाई गई , दिल्ली में भी जयंती मनाई गई । यह बहुत अच्छा व शुभ संकेत हैं । 
आदरणीय लक्ष्मीनारायण जी झरवाल साहब को एक बार पुनः उनके महान कार्यो को याद करते हुए दंडवत नमन।

रामसिंह #बगरानिया #नरहड़ जी की कलम से।

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