मीणा समाज के महापुरुष - MeenaSamaj Social Help Group

Tribal News

शनिवार, 2 नवंबर 2019

मीणा समाज के महापुरुष

जन्म स्थान तथा प्रारम्भिक जीवन
आपका जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रम संवत् 1971 अर्थात् 2 नवम्बर, 1914 को सूर्योदय पूर्व झरवाल सदन, मोती डूंगरी रोड स्थित काली माता के मंदिर के पास जयपुर में हुआ । मत्स्य पुराण के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को ही सतयुग में भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए प्रथम अवतार भगवान मत्स्य का जन्म हुआ । इसी दिन गुरु- नानक देव जी का जन्म मानवता की रक्षा व दलितों के उत्थान, धनवान व निर्धन व ऊँच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए हुआ था । जुलाई 1934 ई में आपके पिता का निधन हो जाने के कारण उनके स्थान पर आप रामनिवास बाग में कार्य करने लगे । आपके अधीन दस आसामी कार्य करते थे, 1934-1938 तक के सेवा काल दौरान अनेक विद्वानों व साधु -संतो के साथ आध्यात्मिक सत्संग में रूचि लेकर भाग लेते रहे ।

राजनीति में प्रवेश
20 अक्टूबर 1938 में किशनपोल बाजार स्थित, आर्य समाज मंदिर मे प्रजामण्डल अधिवेशन शुरू हुआ | जिसमें आपने भी श्रीचंद्र अग्रवाल के साथ भाग लिया जहाँ आपकी जयपुर राज्य प्रजामण्डल के संस्थापक सदस्य श्री हीरालाल शास्त्री, वैद्य श्री विजय शंकर शास्त्री स्वतंत्रता सेनानी आदि नेताओं से भेंट हुई | इस अधिवेशन में अन्य कई प्रस्तावों के साथ मुख्य प्रस्ताव भारत में उत्तरदायी शासन की मांग एवं नागरिक अधिकार दिये जाने सम्बन्धी थी |आप यहीं से प्रजामण्डल के कार्यों में गहरी रूचि लेने लगे और उसी दिन से आपने खादी वस्त्र पहनना शुरू कर दिया, जिसे अब तक निभा रहे हैं | राष्ट्रपिता पूज्य गाँधी जी के सत्य व अहिंसा पर आधारित रचनात्मक कार्य जैसे छुआछूत, अंधविश्वास, जागीरदारी, बैठ-बेगार, लाटा-बाटा तथा नशा बन्दी, कौमी एकता, देश की अखंडता,शिक्षा प्रसार ,जन जागरण आदि में आपकी रूचि दिन-प्रतिदिन बढ़ती गई जिसके फलस्वरूप आगे से प्रजामण्डल के लगभग सभीअधिवेशनों मे सक्रिय भाग लेना प्रारम्भ कर दिया |

सन् 1938 में श्री जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में प्रजामण्डल का द्वितीय अधिवेशन आगरा रोड स्थित नथमल जी का कटला, जयपुर (वर्तमान में यह अग्रवाल कॉलेज के नाम से जाना जाता है) में संपन्न हुआ | इसमें चरखा संघ की ओर से एक खादी प्रदर्शनी भी लगी | यहीं पर आपकी मुलाकात क्रान्तिकारी नेता श्री ओमदत्त शास्त्री व बलवंत राय देशपांडे मंत्री चरखा संघ से हुई | 12 फ़रवरी , 1939 के दौरान जयपुर राज्य में भयंकर अकाल पड़ा था | श्री जमनालाल बजाज अकाल की स्थिति का आकलन करने के लिय वर्धा से जयपुर के लिए रवाना हुए परन्तु राज्य सरकार ने इनके जयपुर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया लेकिन राज्य सरकार की प्रतिबंध की आज्ञा तोड़कर श्री बजाज ने जयपुर में प्रवेश किया जिस पर सरकार ने उन्हें बन्दी बना कर सिसोदिया बाग में कैद कर दिया | इसी दौरान प्रजामण्डल के सत्याग्रह आंदोलन ने ओर जोर पकड़ लिया जिस पर प्रजामण्डल के प्रमुख नेता श्री हीरालाल शास्त्री, बाबा हरिश चन्द्र शास्त्री रामकरण जोशी (दौसा) लक्ष्मी नारायण झरवाल एवं सुलतान सिंह झरवाल जयपुर आदि नेताओं को बन्दी बना लिया |

सन 1941-42 में श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल ने प्रजामण्डल आंदोलनों में खासा उत्साह लेते हुए भाग लिया जिसके कारण आपको बन्दी बना लिया गया और छोटी चौपड कोतवाली मे हाथों मे हथकड़ी डालकर कमरे की छत के कुंदो मे जंजीरों से ऊँचा लटका दिया और कठोर शारीरिक यातनाओं के साथ मानसिक यातनाऐं भी दी गई | साथ ही हाथ व पाँव की अंगुलियों के काली स्याही से प्रिंट लिए गये और इसके अलावा उन्हें एक रुक्का लिख कर दिया गया जिसमें आदेश यह था कि आपको माणक चौक थाना, बड़ी चौपड़ मे प्रतिदिन उपस्थित होकर हाजरी देनी होगी |

कोतवाली पुलिस (छोटी चोपड़) से छूटते ही श्री झरवाल के बाहर आने पर आपको श्रीमाधोपुर निवासी पंडित पं. बंशीधर शर्मा मिल गये | आपने उनके साथ खेजड़ों के रास्ते स्थित श्री हीरालाल शास्त्री के निवास, शास्त्री सदन जाकर श्री शास्त्री जी को उन्होंने पुलिस द्वारा दी गई यातनाओं का पूर्ण विवरण सुनाया | जिस पर श्री शास्त्री जी ने कहा कि तुम माणक चौक थाने पर जाकर कह दो की "मैं हाजरी नहीं दूँगा और ना ही जरायमपेशा कानून मानूंगा |"तदनुसार आप माणक चौक थाने गए , और थानेदार कुशलसिंह को स्पष्ट कह दिया कि मैं इस काले कानून को नहीं मानूँगा | तब तो थानेदार कुशलसिंह ने श्री झरवाल से इतना कहा अभी तो तुम जाओ , मैं उच्च पुलिस अधिकारियों से बातचीत होने के उपरान्त कदम उठाऊॅंगा | |

यह वह समय था जब चारों ओर गौरवशाली मीणा जाति पर जरायमपेशा कानून एंव दादरसी कानून के तहत् दफा 28 के अंतर्गत्अनेक अत्याचार हो रहे थे जिसकी वजह से यहाँ तक कि मीणा जाति के पढ़ने वाले विद्यार्थियों जैसे ज्ञाननाथ, हनुमान, रामगोपाल आदि को पकड़ कर तंग किया जाने लगा | तब से श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल ने अपना सम्पूर्ण जीवन प्रजामंडल आन्दोलनों तथा मीणा जाति पर हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने में लगा दिया | इसके तहत् जयपुर नगर में हर चौकी पर सभा करके जनजागरण करने मे जुट गए | रामबख्स सीहरा जमुवारामगढ़,की अध्यक्षता में मीणा सुधार समिति की स्थापना कर दी गई जिसमें श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल को मंत्री श्योनाथ जी छापोला ग्राम मेंगी को कोषाध्यक्ष तथा गुलाबचंद जी गोठवाल(जयपुर), अड़ीसाल सिंह(कोटपुतली), भोंरीलाल बिरदावत आदि को कार्यकारणी सदस्य चुन लिया |

1942 में अखिल भारतीय मीणा सम्मेलन
अजीजाबाद, जिला बुलन्दशहर ,उत्तरप्रदेश में अयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन अजमेर के प्रसिद्ध समाज सेवी श्री चांदकरण शारदा के कर कमलों द्वारा हुआ और अध्यक्षता श्री झरवाल ने की | इस सम्मेलन में श्री झरवाल ने मीणा जाति के गौरवशाली इतिहास तथा मीणों का राज्य कच्छावाहों ने छल-कपट से छीनने और मीणा जाति को जरायमपेशा कानून के षडयंत्र में जकड़कर नागरिकता से वंचित करने के प्रयासों पर प्रकाश डालने के साथ-साथ जयपुर रियासत में तथा राजस्थान में मीणा जाति पर हो रहे अत्याचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला |

नीम का थाना का विराट सम्मेलन
यह सम्मेलन मुनि मगन सागर जी महाराज की अध्यक्षता में 16 ,17 अप्रैल, 1944 को आयोजित किया गया | जिसका उद्घाटन नव भारत टाइम्स के संपादक श्री सत्यदेव विद्यालंकार के कर-कमलों से हुआ | यह सम्मेलन मीणा जाति के संगठन और जन –जागृति के द्रष्टिकोण से मील का पत्थर सिद्ध हुआ | इसमें श्रीलक्ष्मीनारायण झरवाल ने जरायमपेशा कानून को रद्द करने का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन पं. बंशीधर शर्मा और रामकरण जोशी ने किया | राम सिंह नोरावत, बाबा हरीश चन्द्र शास्त्री जयपुर, मुंशी हरनारायण सिंह और महाशय छाजूसिंह कावत, शाहजहांपुर,( पंजाब), श्री भगूताराम सीकर, अडीसाल सिंह , हरसहाय जेफ़ नयाबास ,अर्जुन देव और चिमना–जमना सिंघाना आदि ने इस सम्मलेन की समुचित व्यवस्था करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया |

(1945)श्री झरवाल को सरकार द्वारा बन्दी बनाया जाना
उदयपुरवाटी, गुढ़ापोंख, चला, चौकड़ी आदि स्थानों पर मीणा जाति पर किये जा रहे अत्याचार व अन्याय के विरुद्ध गुढ़ा में प्रस्तावित प्रजामण्डल के तपस्वी नेता श्री बद्री नारायण खोरा की अध्यक्षता में किसान सम्मेलन के प्रचार-प्रसार के लिए जब श्री झरवाल पर्चे बांट रहे थे उसी समय आपको नीम का थाना रेलवे स्टेशन के बाहर भारत सुरक्षा कानून की धारा 129 के अंतर्गत हेड कांस्टेबल आत्माराम द्वारा बन्दी बना लिया गया और छावनी पुलिस मुख्यालय ले जाकर आपको काठ में दे दिया गया और अनेक कठोर यातनाऐं देना शुरू कर दिया जैसे खुले आसमान में पेड़ के नीचे काठ पड़ा था उसी में श्री झरवाल के दोनों पैरों को फँसा दिया गया | जोरो से आंधी व हवा की वजह से खुले पड़े चौड़े से मैदान में बालू मिट्टी उड़कर आँखों व मुँह में आने लगी | इन परिस्थितियों के बावजूद भी आपने स्पष्ट कह दिया की यदि तुम मेरे शरीर के टुकड़े-टुकड़े भी कर डालो,तो भी महात्मा गाँधी का सत्य व अहिंसा का मार्ग नहीं छोडूंगा | लम्बे समय तक वहाँ काठ में रखकर आपको 3 अप्रैल,1945 को केंद्रीय कारागार, जयपुर में भेज दिया गया | वहाँ पर भी दो माह तक अनेक यातनाऐं दी गई | अंततः 29 मई 1945 को जयपुर जेल से रिहा कर दिया गया |

1945 पं. जवाहर लाल नेहरू से भेंट
स्थान :- वैद्य लच्छीरामजी का बाग मोती डूंगरी रोड,जयपुर यह वह समय था जब हरिपुरा अधिवेशन में कांग्रेस ने यह निश्चय कर लिया था की देशी रियासतों की जनता के नागरिक अधिकारों की रक्षा किये बिना देश की स्वतंत्रता अधूरी रहेगी | अतः देशी राज्य लोक परिषद् का उदयपुर में होने वाले अधिवेशन पर विचार-विमर्श करने के लिए पंडित नेहरु जयपुर आये | 20 अक्टूबर, 1945 को वैद्य लच्छीरामजी का बाग मोती डूंगरी रोड, जयपुर में राजस्थान प्रजामंडल एवं प्रजा परिषद् के गणमान्य नेताओं की बैठक हुई | जिसमे आये गणमान्य महानुभावों के अलावा सर्व श्री शेख अब्दुल्ला (कश्मीरी) , हीरालाल शास्त्री, जयनारायण व्यास, गोकुलभाई भट्ट, सूर्य प्रकाश पापा, खोरा जी, लक्ष्मी नारायण झरवाल, पं. बंशीधर शर्मा आदि नेताओं ने भाग लिया |

श्री झरवाल ने पंडित नेहरु के समक्ष राजस्थान की रियासतों-जयपुर, अलवर , टोंक, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा व अन्य जिलों में मीणा जाति पर जन्म लेने के साथ ही जरायमपेशा कानून को लागू कर लाखों निर्दोष मीणाओं को अनेक प्रकार की यातनायें देकर नागरिक अधिकारों से वंचित कर रखा है, जिस पर की जाने वाली भावी कार्यवाही पर मार्ग दर्शन माँगा और साथ ही जरायमपेशा कानून के अंतर्गत होने वाले अत्याचारों के विशद विवरण के साथ एक ज्ञापन भी प्रस्तुत किया |

इन अमानवीय अत्याचारों को सुनकर पं.नेहरू एकदम स्तब्ध रह गये और पास में बैठे जयपुर प्रजामंडल अध्यक्ष श्री हीरालाल शास्त्री की ओर इशारा करके बड़े जोश के साथ कहा की प्रजामंडल को जरायमपेशा कानून को रद्द कराने के लिए विशेष प्रयत्न करना चाहिये |” बस यही से श्री झरवाल को आगे के कार्यक्रम के लिए मार्ग दर्शन मिल गया |

देशी राज्य लोक परिषद का अधिवेशन
दिसम्बर 1945 व 1,2,3 जनवरी, 1946 को पं. नेहरु की अध्यक्षता में उदयपुर में देशी राज्य लोक परिषद का अष्टम् अधिवेशन आयोजित हुआ | जिसमें भारत की 562 रियासतों से आये जन प्रतिनिधियों ने भाग लिया | जयपुर से तात्कालीन प्रमुख लोगों के साथ श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल भी प्रतिनिधि के रूप में अधिवेशन में पहुँच कर जरायमपेशा कानून को रद्द कराने के उद्देश्य से वातावरण तैयार कर इस सम्बन्ध में एक प्रस्ताव लाया गया | जिसमे अधिवेशन के प्रथम दिन श्री लक्ष्मी नारायण झरवाल ने प्रस्ताव के समर्थन में अपने तर्क रखे | दूसरे दिन ही आदिवासी जन जाति के मसीहा अमृतलाल ठक्कर बाप्पा की अध्यक्षता में आदिवासियों की समस्याओं पर आपस में विचार विमर्श किया गया | जिसमे अन्य मुद्दो के अलावा जरायम पेशा कानून को रद्द करने के लिए जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल को पत्र लिखा गया | इस प्रकार के प्रबल राजनीतिक समर्थन में मीणा सुधार समिति में नवजीवन का संचार हुआ | इस घटना के बाद तो जरायमपेशा आदि काले कानून को रद्द कराने एवं इस निमित राज्य सरकार द्वारा निरन्तर निर्दोष मीणा जाति पर किये जा रहे अत्याचारों के विरुद्ध एक के बाद एक आन्दोलनों तथा सत्याग्रहों का तांता ही लगने लगा |

सीकर में विराट सम्मलेन
31 मार्च 1946 को प्रजामंडल के नेता श्री लादूराम जोशी ( सीकर )की अध्यक्षता में मीणा प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं का सम्मेलन चांदपोल गेट बाहर ,सीकर में हुआ जिसका उद्घाटन अजमेर के प्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता श्री ज्वाला प्रसाद शर्मा कांग्रेस अध्यक्ष अजमेर द्वारा किया गया | स्मरण हो श्री ज्वाला प्रसाद शर्मा सरकार द्वारा राजद्रोह के दोषी करार दिए जाने पर तत्काल गिरफ्तार किये जाने के आदेश की अवहेलना कर रेलगाड़ी से खुले तोर से सीकर पहुचे थे | यही नहीं उनकी स्टेशन से चांदपोल गेट सभास्थल तक एक विशाल जुलूश के रूप में ले जाया गया और जुलूश के आगे-आगे घोड़े पर सवार युवा सरदार अडिसाल सिंह (कोटपुतली) जो ब्रिटिश शासन में सेना छोड़कर मीणा आन्दोलनों में शामिल हो गये थे क्रमशः हाथ में ऊँचा तिरंगा लिए भारत माता की जय , महात्मा गाँधी की जय का नारा बुलंद करते चल रहे थे जुलूश एक किलो मीटर लम्बा था श्री ज्वाला प्रसाद की सवारी के लिए सीकर के राव राजा श्री कल्याण सिंह की शाही बग्गी का इंतजाम किया गया था | इसमें श्री झरवाल ने जरायम पेशा कानून को शीघ्रातिशीघ्र समाप्त करने के लिए प्रस्ताव रखा, जो सर्वसम्मति से पारित हुआ |

गृहमंत्री से भेंट : 24 जुलाई ,1946
पं. बंशीधर शर्मा श्रीमाधोपुर,लक्ष्मीनारयण झरवाल सुरजनराम जेफ(नया बास), अडीसाल सिंह, श्री राजेंद्र कुमार अजेय के साथ एक शिष्टमण्डल मीणा जाति पर से जरायमपेशा कानून समाप्त किये जाने के लिए ज्ञापन सहित गृहमंत्री मेजर जनरल अमरसिंह से भेंट की, जयपुर रियासत की ओर से सहानुभूतीपूर्वक विचार करने के बाद सिध्दांत : इस कानून को रद्द करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और इस सम्बन्ध में 10 अगस्त, 1946 के गजट नंबर-5547 पेज- 51 कॉलम नंबर 4728 में जरायमपेशा कानून को निरस्त करने के आदेश भी राजपत्र द्वारा प्रसारित कर दिए गये |

बागावास सम्मलेन : 27 जुलाई 1946
बागावास सम्मेलन में पं हीरालाल शास्त्री ने विधिवत् घोषणा कर दी की आज से सभी मीणा जाति के लोग स्वतंत्र नागरिक हैं क्योंकि काले कानून को सरकार ने निर्दोष मीणा जाति पर से समाप्त कर दिया है | फिर तो समाज में हर्षोल्लास का ठिकाना ना रहा इस दिवस को विजय दिवस के रूप मे मनाया गया और समस्त बागावास कस्बे व आस-पास की पहाड़ी रोशनी से जगमगा उठी | बाद में सरकार ने अपना वचन भंग कर जरायमपेशा कानून के अंतर्गत धारा 28 को लागू रखा जिसके तहत एम. पास देना शुरू कर दिया जिसमे बिना इजाजत ऊँट रखने पर गिरफ्तार करना प्रारम्भ कर दिया | इस तरह सैकड़ों मीणा बन्धुओं के ऊटों को जब्त करना और पशुमालिको को जेल में भेजना आरम्भ कर दिया | यह एक तरह से भ्रामक दूसरी बेडी डालने समान कुचेष्टा की गई जिसका भी समाज के लोगों ने जमकर विरोध किया |

मीणा संघर्ष समिति का ऐतिहासिक दिवस, जयपुर 5 जून 1947
स्थान :- देवडी जी का मंदिर ,जौहरी बाजार,जयपुर (राजस्थान ) मीणा संघर्ष संचालन समिति की ओर से जयपुर में 5 जून ,1947 को एक प्रभात फेरी के साथ-साथ विशाल जुलूस का आयोजन हुआ, जिसमें आगे-आगे जरायमपेशा कानून को मुर्दा मानव मानकर ताबूत के आकार में उसकी आकृति प्रदर्शित की गई , इस मुर्दा मानव ताबूत को श्री राजेन्द्र कुमार अजेय की जीवन सहचरी श्रीमती प्रभावती"रानी" द्वारा बनाया गया था |

दूसरी ओर मुक्त मानव का एक विशाल चित्र बनाया गया, जिस पर दासता, गुलामी, बेगार प्रथा तथा नागरिक अधिकारों के हनन के विरोध में नारे अंकित थे |

जुलूस हजारों नागरिकों के जयघोष के साथ बड़ी चौपड़ से त्रिपोलिया बाजार,किशनपोल बाजार, न्यू गेट और जौहरी बाजार के लिए बढ़ने लगा जुलूस के आगे मीणा संगठन के क्रांतिकारी नेता श्री अडीसाल सिंह हाथ में तिरंगा झंडा लिये घोड़े पर बैठकर कर चल रहे थे | उनके पीछे बैण्ड –बाजे राष्ट्रीय गीत एवं क्रांति गीत “कदम से कदम बढ़ाये जा खुशी के गीत गाये जा ” की धुन बजाते चल रहे थे | पीछे- पीछे गाँधी टोपी पहने छात्रों के जत्थे, हाथों में तिरंगा झंडा लिये श्री भैरूलाल “कालाबादल ” क्रांतिकारी पथिक जी का गीत गा रहे थे | “प्राण मित्रों भले गवाना, पर झंडा न झुकाना | ” जुलूस धीरे- धीरे आगे बढ़ रहा था, क्रांतिकारी मीणा सरदार व अन्य लोग अपने हाथों में तख्तिया लेकर चल रहे थे जिन पर लिखा था “एम. पास की होली जलाओ - दफा 28 को दफना दो – सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ा दो |”

अनेक क्रांतिकारी मीणा सरदार व अन्य लोग महात्मा गाँधी व भारत माता की जय और जरायमपेशा कानून का नाश हो के नारों के साथ जयपुर को गुंजित कर रहे थे | स्थान – स्थान पर स्थानीय लोगों ने मीणा समाज के जुलूस में भाग लेने वाले लोगों का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया | जुलूस जौहरी बाजार स्थित प्रजामंडल के कार्यालय देवडी जी मन्दिर के पास पंहुचा तथा वहाँ विशाल सभा में परिणत हो गया | सरकार की दमन नीति के विरुद्ध अनेक वक्ताओं ने भाषण दिये कि जरायमपेशा कानून किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता |

सभा कि अध्यक्षता श्री राजेंद्र कुमार अजेय और श्री सिद्धराज ढडा ने उद्घाटन किया और कहा कि जरायमपेशा कानून किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता | महात्मा गाँधी ने कहा हैं किअन्याय करने वाला तो अन्यायी होता हैं किन्तु उस अन्याय को सहन करने वाला उससे भी बड़ा अन्यायी होता हैं |

सभा में श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल का ओजस्वी भाषण हुआ जिसमें विस्तार से बताया गया कि किस प्रकार राज्य सरकार ने 10 अगस्त 1946 को मीणा जाति पर से प्रतिबंध हटाने के आदेश दे दिए थे परन्तुअब सरकार अपने ही आदेश की अवेहलना कर हमें एम.पास लेने को विवश कर रही है परन्तु हम इस प्रकार के प्रतिबंध को कभी स्वीकार नहीं करेंगे | सरकार के अत्याचारों का डटकर विरोध करेंगे | हम सत्याग्रह करके सरकारी जेलों को भर देंगे ,इस विशाल प्रदर्शन में जयपुर रियासत के ही नहीं वरन अलवर, टोंक, भरतपुर आदि रियासतों से भी अनेक मीणा सरदार उपस्थित हुए | सभा बड़ी शांति व उत्साहपूर्वक वातावरण से चल रही थी कि इस बीच पुलिस अधीक्षक वहाँ आकर अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार अजेय को बन्दी बनाकर कोतवाली ले गए परन्तु श्री अजेय ने जाते-जाते घोषणा कर दी कि मेरे लौटने तक सभा में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए | सभा यथावत चलती रही , बीच-बीच में श्री झरवाल सभा को संबोधित करते रहे | इसी बीच श्री राजेंद्र कुमार जी अजेय पूछताछ के बाद कोतवाली से छोड़ दिए गये |

मीणा सुधार समिति के मंत्री श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल ने पुतले में आग लगा कर दाह संस्कार की परम्परा पूरी की | इसके साथ उपस्थित जन समूह जरायमपेशा कानून मुर्दाबाद के नारे के साथ लोग हर्षोल्लास के साथ कह रहे थे की वर्षों से लगा यह कानून खत्म हो गया | इतना कहते –कहते श्री लक्ष्मीनारयण झरवाल ने लोगों से आव्हान किया की जिनके पास दास्ताँ का चिन्ह एम.पास हो तो उसे इस होली में फेंक दो |

यह दृश्य बहुत रोमांचित था | स्वत: ही दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपिता बापू के आव्हान पर ट्रान्सवाल एशियाटिक कानून की होली जलाने जैसा दृश्य उपस्थित हो रहा था |

इस कानून के अनुसार ट्रान्सवाल में रहने वाले भारतीयों को पुलिस में अपने नाम का पंजीकरण कराना पड़ता और स्टाम्प पर अंगूठे की निशानी लगानी पड़ती थी | यह एक प्रकार से जरायम पेशा ही था | अतः बापू के कहने से 1907 में काले तथा मानवता पर कलंकित कानून की होली जलाई गई वही दृश्य 5 जून 1947 को मीणा क्रांतिकारियों ने अपनी गुलामी के पास व पट्टे आग को भेंट कर दिए | इस तरह जरायम पेशा कानून की दफा 28 को दफ़न कर किया गया |

सभा रात को 12 बजे तक चली , सभा मे लगभग 10 हजार मीणा प्रतिनिधियों ने भाग लिया | उस आयोजन में प्रमुख मीणा मुखिया श्री भगूताराम (सीकर), हरसहाय (नयाबास), बद्रीप्रसाद दुखिया बाबा  ( भरतपुर) , गोमाराम (रामपुरा), मालाराम पबडी (छाजना), प्रभुदयाल हाटवाल (रींगस) , चंद्रा (बागावास), गोपीराम मीणा (मानपुर) , सांवत राम मीणा (भानपुर माचेडी), गणेश (मेड), कल्याण झरवाल (बूज), सुरजाराम (पोकरिया), नारायण छोलक-(आजराजपुरा), झूथालाल झरवाल, आकाशवाणी जयपुर, महादेव बैंदाडा जयपुर , सुरजाराम पबडी (लाम्या), बन्नाराम जूनदा (दूदू), जवाहारा मानुताल (रातेखेडा), महादेव चांदा जिला जयपुर , रघुनाथ पबरी(थोलाई) , भोमा राम मीणा (थोलाई), आदि के भरपूर सहयोग से हुआ | सभा समाप्त होने से पहले महात्मा गाँधी की जरायमपेशा कानून का नाश हो,नागरिक अधिकार-जिन्दाबाद के नारों से सभा का समापन हुआ |

मीणा संघर्ष समिति का ऐतिहासिक दिवस,जयपुर 6 जून 1947
स्थान :-प्रजा मंडल आश्रम, गोविन्द राय का रास्ता ,चाँदपोल, जयपुर | 6 जून 1947 ई. को सुबह 10 बजे गोविन्दराय जी का रास्ता चांदपोल बाजार जयपुर में प्रजामंडल आश्रम में एक विशाल मीणा प्रतिनिधियों की सभा का आयोजन किया गया,जिसमें जयपुर,अलवर,भरतपुर,कोटा आदि से आये हजारों मीणा पंच कार्यकर्ता की उपस्थिति थी, हाथों में तिंरगा झंडा और तख्तियों पर नागरिक अधिकारों को लेकर रहेंगे , क्रीमिनल ट्राइब एक्ट खत्म हो पुलिस के अमानुषिक अत्याचार समाप्त हो, अधिकार लेंगे या मरेगें के नारे लिखे हुए थे |

सभा की अध्यक्षता श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल, मंत्री मीणा सुधार समिति जयपुर कर रहे थे | सभा को संबोधित करते हुए आपने बताया की अंग्रेज सरकार और राजा – महाराजाओं ने मिलकर 1818 में संधि की और राजाओं को शासन में मनचाहा कानून बनाने का एकाधिकार दिया | देशभक्त मीणा और प्रजामंडल के नेताओं पर क्रिमिनल ट्राइब एक्ट की(1924 में ) रचना कर जयपुर राज्य सरकार ने पूरी रियासत पर अमानवीय जुल्म ढहाने का अधिकार प्राप्त कर लिया | मीणा जाति ने और प्रजा मंडल ने काले कानून का बराबर विरोध किया | राज्य व केंद्र सरकार हमें गिरफ्तार करके जेल भेजे तो हम सब बड़ी संख्या में जेल जाने को तैयार हैं | यह भी तय किया गया, श्री झरवाल ने यह भी आव्हान किया की हमें अब सत्याग्रह आन्दोलन को चलाने के लिये धन जन की आवश्कता है और अपनी अंतर आत्मा व परमेश्वर को साक्षी कर यह बता दे की आप जेल जाने को तैयार है |

इस प्रभावशाली भाषण को सुनकर सब मीणा प्रतिनिधियों ने एक साथ अपने हाथ उठाकर जोर से उद्घोष किया कि हम अपने नागरिक अधिकारों व देश की आजादी के लिये हम जेल जाने को तैयार है | देखते- देखते ही मीणा सरदारों ने हजारों रुपयों का ढेर लगा दिया | राजेंद्र कुमार अध्यक्ष मीणा सुधार समिति व भैरूलाल काला बादल, अडीसाल सिंह कोषाध्यक्ष आदि वक्ताओं ने प्रभावशाली भाषण दिए |महात्मा गाँधी ,पं. नेहरु प्रजामंडल व कांग्रेस का जय-जयकार के नारे लगाने के साथ ही सभा समाप्त हो गई | कार्य के आयोजन में प्रमुख मीणा मुखिया श्री भगूताराम (सीकर), हरसहाय (नयाबास), गोमाराम (रामपुरा), चंद्रा (बगावास), गणेश (मेड), कल्याण (बूज), श्री सुरजाराम (पोकरिया), नारायण छोलक-(आजराजपुरा), झूथालाल झरवाल, आकाशवाणी जयपुर, सुरजाराम पबडी (लाम्या), बन्नाराम जुनदा (दूदू), जवाहारा मानुताल (रातेखेडा) आदि का भरपूर सहयोग रहा |

राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति भारत सरकार राष्ट्रपति भवन न्यू दिल्ली
जरायमपेशा जातियों की जाँच के लिये श्री चालिया के नेत्रत्व में जाचं कमीशन नियुक्त की जाँच के लिए श्री चालिया की देखरेख में जाँच कमीशन नियुक्त किया गया | श्री चालिया व जरायम पेशा जातियों की जाँच कमीशन के सदस्य 15 जून 1950 को चितौड़ ,उदयपुर,जोधपुर,अजमेर होते हुए 30 जून को जयपुर पंहुचे | 1 जुलाई ,1950 में बागावास,नयाबॉस आदि मीणाओ के चाल चलन व रहन-सहन के सम्बन्ध में जाँच करने का कार्यक्रम बना |श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल मंत्री मीणा सुधार समिति जयपुर की देखरेख में जरायमपेशा जातियों की जाँच कमीशन से अलग सचिवालय में 1 जुलाई 1950 को मुलाकात की और मीणा जाति में जन्म लेने के साथ लाखों निर्दोष ईमानदार लोगों पर जरायमपेशा कानून लगाकर उन्हे नागरिक अधिकारों से वंचित रखने व अनेक प्रकार के जुल्म तथा यातनओं का शिकार न बनाये जाने के विरुद्ध ज्ञापन दिया | जरायमपेशा जाँच कमीशन के सदस्यों द्वारा उठाये गए प्रश्नों का श्री लक्ष्मीनारयण झरवाल और श्री राजेंद्र कुमार जी अजेय, श्री अडीसाल जी कोटपुतली राय आदि ने संतुष्टिपूर्ण उत्तर दिया |

इसी बीच सरकार की ओर से जरायमपेशा कानून के स्थान पर अपराधीअभ्यस्त बिल विधान सभा में पेश करने की घोषणा कर दी| जिसमें खासकर मीणा जाति के लोगों पर एक बार सजा पाने के उपरान्त उसे अभ्यस्त अपराधी बना देने जेसे भेदभाव पूर्ण प्रावधान था जिसके विरोध में मीणा समाज आक्रोषित हो कर विचार विमर्श किया ओर इसके विरोध में जनमत तैयार करने का निर्णय लिया | प्रथम कदम के बतोर इस बिल के खिलाफ तात्कालिक " नेता नामक" साप्ताहिक समाचार पत्र में लेख प्रकाशित किया गया तत्पश्चात चन्दलाई, गुणसी, मोहनपुरा,बागावास ,बैराठ, बागावास आदि अनेक स्थानों पर मीणा प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओ के जगह -जगह सम्मेलन का आयोजित कर भेदभाव वाले प्रावधानो वाले इस बिल का जोरदार विरोध किया गया |यही नहीं इस मुद्दे को लेकर राजस्थान विधान सभा में सदस्यों जेसे भगवान सिंह तरंगी, भैरूलाल काला बादल आदि ने विधानसभा में मुखर होकर प्रतिरोध दर्ज करवाया जिसपर पुनर्विचार के लिए विवश होकर विधान सभा की प्रवर समिति को भेजा गया ओर अंततः जाति विशेष के साथ भेदभाव वाले प्रावधानों को संशोधित कर दिया गया


आरक्षण के लिये संघर्ष
आरम्भ में मीणा जाति को केवल पिछड़ा वर्ग में समिलित किया गया था परन्तु दूसरी ओर भारत सरकार ने संविधान प्रदत प्रावधान के अनुसार चितौड, ,उदयपुर,डूंगरपुर ओर बांसवाडा के भील आदिवासियों को यह सुविधा प्रदान कर दी गई थी परन्तु शेष जिलों के आदिवासियों को यह सुविधा सुलभ नहीं थी | काका कालेलकर व भीखाभाई ने जो रिपोर्ट भारत सरकार के सामने रखी उसी को सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने सन् 1956 राजस्थान के सभी मीणा आदिवासियों को अनुसूचित जन जाति सुलभ आरक्षण किये जाने बाबत भारत सरकार राज में आज्ञापत्र जरी कर दिया जिससे शिक्षार्थियों को छात्रवृति, राज्य व केंद्र सरकार में नौकरिया ,विधानसभा व लोक सभा ,जिला परिषद आदि में आरक्षण का लाभ मिलना सुलभ हो गया | यह आरक्षण का लाभ मीणा समाज की प्रगति में लाभदायक साबित हुआ ओर मुख्यधारा में जुड़ने में कारगर साबित हुआ इस प्रयास में श्री झरवाल अग्रणी रहे जिसका समाज ऋणी है ससम्मानओर आपका सदैव आदर करता रहेगा |

बगरू समेलन (15 जून,1952 )
आरक्षण की यह सुविधा केवल आदिवासी भील जाति तक ही सिमित थी | जयपुर,अलवर,भरतपुर, जोधपुर,बीकानेर,कोटा,झालावाड जगहों के मुख्यधारा से पिछडे विशाल मीणा समूह को यह सुविधा प्रदान नहीं की गई | ऐसी निराशा की स्थिति से निपटने के लिये श्री लक्ष्मीनारयण झरवाल, राजेंद्र कुमार अजेय, सीताराम झालानी,जवाहारा राम ,रामचन्द्र मानुताल (राताखेडी) ,झुथा नाढ़ला ने दिनाकं 15 जून 1952 में एक समेम्लन आयोजित किया | जिसमे सर्व सम्मति से मीणाओ को भी आरक्षण का लाभ देने का प्रस्ताव पारित किया | श्री झरवाल की अध्यक्षता में इस सम्मलेन में अलवर,भरतपुर और टोंक के भी प्रमुख मीणा सरदार उपस्थित हुए |

काका कालेलकर से भेंट (22 जुलाई 1954 )
बगरू प्रस्ताव के अनुसार भारत सरकार को अनेक आवेदक पत्र दिए गए | अंत में भारत सरकार ने काका कालेलकर की अध्यक्षता में एक जाचं कमीशन की नियुक्ति की जिसमें भीखाभाई डूंगरपुर भी सदस्य थे | 22 जुलाई 1954 को श्री झरवाल एवम श्री अजेय आदि प्रतिनिधियों ने सचिवालय में काका कालेलकर से भेंट की | काका कालेलकर को प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देकर तथा मीणा जाति के पिछड़ेपन की दयनीय स्थिति से पूर्ण परिचित कराया और संतुष्ट कर दिया | इस पर उन्होंने पूरा आश्वासन दिया कि में भारत सरकार को शीघ्र इस बात की अनुशंसा /सिफारिश करूगां की जयपुर, अलवर, भरतपुर,टोंक ,जोधपुर आदि मीणा लोगो को आरक्षण का लाभ कर दिया जाये | काका कालेलकर व भीखा भाई के प्रतिवेदन पर भारत सरकार ने 1956 में जयपुर,अलवर कोटा झालावाड आदि जिलों के मीणा समाज को आरक्षण का लाभ देने हेतु भारत सरकार के राज-पत्र में प्रसारित कर दी, जिससे मीणा छात्रों को छात्रवृतियाँ राज्य व केंद्र सरकार में नौकरिया,विधानसभा व लोक सभा ,जिला परिषद आदि में आरक्षण का लाभ मिलने लगा |

आरक्षण का लाभ मीणा जाति की उन्नति का एक मुख्य आधार सिद्ध हुआ | इस पर मीणा सुधार समिति के मंत्री श्री झरवाल जिनके सद्प्रयत्नों से पिछड़े समाज की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ और समाज मुख्यधारा की ओर अग्रसर होने लगा | सभी लोग इस महान सामाजिक कार्य के लिये आपके ऋणी और आभारी है | फलतः प्रदेश और उसके बाहर भी समाज का बच्चा- बच्चा आपको आदर का शीर्षपात्र मानता है |

समाज सुधार समिति एवं शिक्षा के लिये कार्य
आरक्षण मिलने के साथ समाज में एक नई चेतना आई , राजस्थान मीणा सुधार समिति, मुख्यालय जयपुर ने इस ओर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | समिति के मन्त्री के बतौर श्री झरवाल ने जिले वार जिला समितियाँ बनाकर सदस्य बनाने का अभियान चलाया , जिसमे प्रथमवार सदस्य शुल्क केवल एक रूपया सालाना रखा गया | आरक्षण की कामयाबी देखते निःस्वार्थ ओर प्रत्येक जिले में कर्मठ लोंगो का जाल सा फैलता गया | श्री झरवाल की अगुवाई में नवनिर्मित टीम ने भविष्य की कार्य रुपरेखा तैयार की जिसका केन्द्रबिंदु यह तय किया गया कि घर-घर में लड़कों ओर लडकियों को शिक्षित किये बिना ओर इसके साथ- साथ व्याप्त सामाजिक बुराइयों को जड़ मूल से खात्मा किये बिना समाज की उन्नति सम्भव नहीं हो सकती | फिर तो क्या था समर्पित मुखियाओं ओर कार्यकर्ताओ की जिलेवार ओर तहसीलवार राजस्थान मीणा सुधार समितियों का गठन कर गाँव -गाँव, में अभियान चलाया।

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