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Tribal News

रविवार, 3 नवंबर 2019

स्वतंत्रता सेनानी श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल जी की 106वीं जयंती पर नमन


प्रसिद्ध  स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, मीणा इतिहास के लेखक श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल जी की 2 नवंबर को 106वीं जयंती है।

2 नवम्बर 1914 को जयपुर में आपका जन्म हुआ। वह 100 वर्ष से अधिक जीने वाले एक मात्र  आजादी के सिपाही  रहे हैं।

श्री झरवाल जी बीमारी के दौरान  बिस्तर  पर लगाने लगे  थे , नारे- _-एक सौ ग्यारह : एक हो! ! एक हो।

श्री झरवाल जी की मृत्यु लगभग 102 वर्ष की आयु में हुई है।श्री झरवाल जी बीमार हुए थे, तब मैं मिलने रुंगटा अस्पताल गया।

वे कई दिनों से बोल नहीं पा रहे मुझे देखकर श्री झरवाल जी  अचानक बोलने लगे।उन्होंने जोर जोर से बोला:-, एक हो। एक हो। फिर कई बार बोले :-- " एक सौ ग्यारह"

उनके बेटे डॉक्टर महेंद्र  जी ने और उन्हें  देख रहे  डॉक्टर ने भी  अचम्भा किया। कई दिनों से बोल नहीं पा रहे श्री झरवाल जी जोर से एक हो एक हो ,बोलने लगे थे।

श्री झरवाल जी 1938 से प्रजामंडल आंदोलन में जुड़ गए।

मीणा समाज के विरुद्ध " जेरायम पेशा  कानून  अंग्रेजों ने लगाया था। श्री झरवाल जी ने इस कानून को समाप्त करने के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी। समाज सुधार के लिए काम किया । नशाबंदी आंदोलन  चलाये।

श्री झरवाल जी ने 1942 में बुलंदशहर में मीणा जाति के सम्मेलन में शिरकत की।

श्री झरवाल जी ने 1944 में मुनि मगन  सागर द्वारा आयोजित " नीम का थाना  मीणा सम्मेलन में भाग लिया।

श्री झरवाल जी ने आजादी की लड़ाई लड़ी।

जेलों में आपको यातनाएं  दी गई।

पुलिस द्वारा भी कई बार गिरफ्तार किया गया। लेकिन आजादी और समाज  सुधार की ललक ने आपको मजबूती दी।

मीणा जाति के आरक्षण आंदोलन में भी श्री झरवाल जी ने  की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

श्री झरवाल जी ने काका कालेलकर आयोग के सामने मीणा समाज के पिछड़ेपन को तार्किक ढंग से पेश करवाया।

उनकी बुलंद  आवाज  रूंगटा अस्पताल के  कमरे में आज भी गूंज रही है:-  एक हो। एक सौ ग्यारह । एक सौ ग्यारह। इसका भाव उनका यह होगा कि एक और एक ग्यारह होते हैं अर्थात मीणा समाज को एकता के सूत्र में बांधिए।

श्री झरवाल जी ने  के साथ सामाजिक विषयों पर चर्चा करने का मुझे सौभाग्य मिला है।

मैं वर्ष 1990 में उनसे प्रथम बार  मिला। राजाबाबू जी मुझे मिलाने ले गए। इसके बाद अनेक बार सामाजिक सम्मेलनों में मुलाकात होती रही। जब वह जीवित थे ,जन्म दिवस की बधाई देने मोती डूंगरी  जाया करता था ।

मैंने कई बार उनके साथ मीटिंग में भाग लिया है। वह वास्तव में संघर्ष की प्रतिमूर्ति थे।

9 अगस्त 2016 को  विश्व आदिवासी दिवस के अवसर में हमनें श्री झरवाल जी ने  को  सम्मानित किया।

हमें गर्व  होना चाहिए कि मीणा समाज में ऐसी महान् विभूति पैदा हुई।

श्री झरवाल जी ने के जीवन से उनके व्यक्तित्व -  कृतित्व से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए।

महान स्वतंत्रता सेनानी श्री झरवाल जी ने की 106वीं जयंती पर सम्पूर्ण समाज उन्हें याद कर रहा है।
रामावतार मीणा ,  आर .  ए.  एस.   जयपुर (  राजस्थान) की कलम से :-
https://www.youtube.com/watch?v=DAuVX70la00

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