उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 10 आदिवासियों की हत्या। - MeenaSamaj Social Help Group

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शनिवार, 2 नवंबर 2019

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 10 आदिवासियों की हत्या।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 10 आदिवासियों की हत्या।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के घोरावल तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मूर्तियां के उभ्भा गांव में गोंड़ आदिवासियों की 600 बीघा जमीन को लूटने के लिए हत्यारे लोगों ने उन पर गोंलियां बरसायी, जिसमें तीन महिला समेत 10 गोंड आदिवासी मारे गये और 25 लोग घायल हो गए। देश की आजादी से पहले से ही गोंड़ आदिवासी पुश्तों से उस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं लेकिन उन्हें आज तक पट्टा नहीं दिया गया।
बल्कि सरकारी पदाधिकारियों की मिली-भगत से उक्त जमीन को एक नौकरशाह और ट्रस्ट के नाम पर लिख लिया गया उसके बाद जमीन को किसी और को बेच दिया गया। जमीन का खरीददार व उसके किराये के लोग दल-बल और ट्रक्टरो में अपने साथियों को लेकर जमीन जोतने आया और आदिवासियों द्वारा विरोध जताने पर उन पर गोलियां बरसायी गयी।

जब देश आजाद हुआ था उस समय के राजा महाराजाओं के पास महल, अकूत दौलत व बड़ी मात्रा में जमीने उनके पास छोड़ दी गई जबकि आदिवासी जो कि पहाड़ और जंगल में रहते हैं उनके नाम पर अभी तक भी जमीने आवंटित नहीं की गई है। यही कारण है कि आदिवासियों की जमीन आसानी से दबंग लोगों द्वारा छीन ली जाती है और आदिवासी कुछ नहीं कर पाते। वर्ष 2006 में वन अधिकार अधिनियम आने के पश्चात अभी तक भी अनेकों राज्यों में वन अधिकार अधिनियम की पूर्णतः अनुपालना नहीं हो पाई है और आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने के प्रकरण सामने आते रहते हैं। कुछ दिन पूर्व माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे आदेश जारी किए थे कि जिन आदिवासियों के भूमि आवंटन के प्रकरण रद्द कर दिए गए हैं उन्हें जंगल से बेदखल कर दिया जाए परंतु सरकार ने दया का भाव दिखाते हुए अपील की जिस पर और मौलत मिल गई है।

इस विषय में निम्न कार्यवाही की आवश्यकता है -

1. आदिवासियों की भूमि को छीनने वाले लोगों के विरूध्द प्रशासन द्वारा त्वरित कड़ी कार्रवाई की जाये।

2. केंद्र व राज्य सरकारों को दया का भाव दिखाते हुए आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत जल्द ही पुश्तैनी भूमि के कानूनी अधिकार के दस्तावेज प्रदान करवायें।

3. सभी जन नेताओं खासकर आदिवासियों को चाहिए कि वे आदिवासियों को मिलने वाले भूमि अधिकार पत्र आबंटन की मॉनिटरिंग करें और जल्द से जल्द उन्हें अधिकार पत्र दिलवाये।

4. समाजसेवी व पढ़े लिखे लोगों को चाहिए कि एक अभियान चलाकर अपने अपने या जहां सम्भव हो सके वहां गांव, तहसील व जिला में देखें कि कितने भूमि अधिकार से संबंधित प्रकरण लंबित हैं उनकी स्वयं समीक्षा करें एवं पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर व क्षेत्र के नेताओं की मदद लेकर उन्हें  भूमि अधिकार पत्र दिलवाने में मदद करें।

रघुवीर प्रसाद मीना

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