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गुरुवार, 30 मई 2019

हर गाँव में एक सत्यपालसिंह मीणा जैसा हो, तो कैसा हो?

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तो कैसा हो ।
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IRS डॉ. सत्यपाल सिंह, जिन्होंने बदल दी अपने गांव की तस्वीर और तसवीर बाकी गावो की।।।।।
#IRS_डॉ_सत्यपाल_सिंह_जुझारू_कर्मठ_निष्ठावान_ऊर्जावान_कर्मठ_जुझारू_ईमानदार_एवं_संघर्षशील_पुरुष_दृढ़ मनके पक्के, शांत,प्रकृति के आगे समर्पित होने वाले,अतिकल्पना-शक्ति के फेर में न पड़नेवाले,कल्पनाशक्ति व रचनात्मकता में वास्तविक धरातल पर खड़े होकर सामंजस्य बिठाने वाले है।यह दुनियाँ ऐसे ही लोगों के लिए है।ये लोग खुद तो सुखी होते ही है और अपने आसपास के लोगों को भी सुख बांटने वाले होते है।
उनकी त्याग, तपस्या की एक झलक।।।।।
धौलपुर। जिले का एक छोटा सा गांव #धनौरा। कभी ज्यादा चर्चित नहीं था। लेकिन अब बच्चे-बच्चे की जुबां पर है। क्योंकि यहां #सत्या ही #सत्य है। सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन सत्या ही यहां अब सब कुछ हैं। सत्या यानी डॉ. सत्यपाल सिंह। निश्चित रूप से देश के गांव लगातार बीते कुछ दशक में लगातार पिछड़ रहे हैं, लेकिन सत्यपाल सिंह के हौसलों ने धनौरा में नई जान फूंक दी है। अब धनौरा में पलायन मुद्दा नहीं है। यहां गांव का विकास, गांव की तरक्की, गांव में रोजगार और गांव की खुशहाली सबसे बड़ा मुद्दा है। धनौरा गांव से निकले सत्यपाल सिंह मीणा आजकल इंदौर में बतौर संयुक्त आयुक्त, आयकर विभाग सेवाएं दे रहे हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल करते-करते सिविल सेवाओं की तैयारी और आई.आर.एस. बने। सेवाओं में तैनाती के साथ ही सत्या ने अपने गांव की जैसे तस्वीर ही बदल कर रख दी है।

सत्यपाल ने धनौरा में ‘सोच बदलो, गांव बदलो’ की मुहिम का आगाज किया। आलम यह है कि सत्यपाल की यह मुहिम अब आंदोलन बन चुकी है। सोच बदलो गाँव बदलो टीम का गठन 21 मई 2017 को मानवता और “#पे_बैक_टू_सोसाइटी” के सिद्धांत पर विश्वास रखने वाले युवा साथियों ने किया था। इसका प्राथमिक उद्देश्य समाज में जन जागरूकता और सामाजिक जन चेतना पैदा करना, बच्चों और युवाओं का मार्गदर्शन करना, विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुँचाना और पारस्परिक सहयोग और सहभागिता के माध्यम से गाँव की समस्याओं को गाँव स्तर पर सुलझाने का प्रयास करना था ।इसी क्रम में टीम द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन पिछले 2 वर्षों से किया जाता रहा है । उदाहरण के लिए “सोच बदलो गाम बदलो यात्रा” “ग्रीन विलेज क्लीन विलेज प्रोग्राम” “शिक्षा पाओ ज्ञान बढ़ाओ प्रतियोगिता” “आओ पढ़ें-आगे बढ़े प्रोग्राम” “रक्तदान महादान का प्रोग्राम” “आधुनिक कृषि की उपयोगिता से संबंधित प्रोग्राम” “महिला सशक्तिकरण के प्रोग्राम” इत्यादि । इसके साथ साथ सरमथुरा में बच्चों के लिए उत्थान कोचिंग संस्थान का संचालन भी किया जा रहा है। टीम के साथियों ने शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय किया कि बच्चों के भविष्य को मज़बूती देने के लिए कोचिंग संस्थान के संचालन के साथ साथ “ स्किल डेवलपमेंट सेंटर” का भी संचालन किया जाए और इसके लिए एक उत्थान भवन बनाने का सपना टीम ने देखा ।
गांव मे प्रयास इस हद तक किए जा रहे हैं कि गांव में बच्चे, बड़े, बुजुर्ग और महिलाएं सब एक सूत्र में बंधकर गांव को बुलंदियां छूने में जुटे हुए हैं। यहां हर कार्यक्रम की एक अलग रूपरेखा है। हर कार्यक्रम की एक टीम है। चरणबद्ध कार्ययोजनाएं हैं। गांव के विकास संबंधी सूचनाओं के संग्रहण की फीडबैक टीम है। सामाजिक बुराईयों के खिलाफ मुहिम का एक सफल खाका है। कुल मिलाकर गांव स्वयं एक अर्थव्यवस्था बन गया है। लेकिन धनौरा की यह मुहिम अब आसपास के गांवों पर भी अपना असर छोड़ रही है। सत्यपाल जब भी छुट्टियों में गावं आते हैं, फीडबैक और फ्यूचर प्लानिंग के साथ एक कदम और आगे बढ़ते हैं। इस दीपावली सत्यपाल का यह मिशन पास ही के गांव रघुवीरपुरा (डांग क्षेत्र का ही एक छोटा सा गांव) और खिन्नोट गांव तक पहुंचा। इन दोनों ही गांवों में फीडबैक लिए गए। गांव में शराब से त्रस्त लोगों के लिए समाधान और चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर समाधान खोजे गए। युवाओं को प्रेरित किया गया और सामाजिक कार्यों में जनसहभागिता सुनिश्चित की गई।

आई.आर.एस. डॉ. सत्पाल सिंह इस गांव के लिए ही नहीं, देश के उन सभी गांवों के लिए मिसाल बन गए हैं, जिन्हें अब एक आवाज देने मात्र की जरूरत है। सत्यपाल सिंह ने सेवाओं में चयन के बाद अपने गांव को भूलने की बजाय उसे #स्मार्ट_विलेज का दर्जा दिलावाया। उन्होंने बचपन की अंधेरी गलियों में चंदे के पैसे बल्ब जलाने की मुहिम को बदलते समय के साथ सार्थक जनआंदोलन बना डाला है। अपने घर में बदलाव के आगाज के साथ गांव की रगों में सपनों के सींचा है। जनप्रतिनिध्यिों, प्रशासन और जनसहभागिता को विकास में भागीदार बनाकर सत्या ने बेहद अल्प समय में वह कर दिखाया है, जो पीढ़ी गुजर जाने के बाद भी पीछे से नजर नहीं आता। सत्यपाल सिंह ने जिस विचारधारा को अपनाया है अगर देश के अधिकारी अपने-अपने गांवों को विकसित करने की इसी विचारधारा को अपना लें, तो हजारों गांवों का भला आसानी से संभव है। आज धनौरा गांव में इंफोर्मेशन सेंटर है, हर घर में शौचालय है, कम्यूनिटी सेंटर और सीवरेज ट्रीटमेंट लाइने बिछी हुई है। कहने को धनौरा आबादी के लिहाज से गांव है, लेकिन विकास के लिहाज से इसे आदर्श गांव में शहरों से कम कुछ भी नहीं है।

इधर धनौरा के मॉडल और विकास को देखते हुए राजस्थान सरकार ने गांवों को सुविधायुक्त स्मार्ट विलेज बनाने की पहल की है। धनौरा से शुरू हुआ सत्यपाल का मिशन निकट के करीब 50_100 गांवों तक पहुंच चुका है। इन गांवों में पूर्ण शराबबंदी हो चुकी है। यहां ‘सोच बदलो, गांव बदलो’ का नारा बुलंद हो रहा है। धनौरा सहित आसपास के गांवों में ईको नीड फाउंडेशन के तहत विभिन्न योजनाओं को नई दिशा दी जा रही है। इस बड़े बदलाव के प्रेरक और जनक डॉ. सत्यपाल बेहद विनम्रता से आगे बढ़ रहे हैं। इस मुहिम को लेकर उनके सपने बेहद सुलझे हुए हैं। सत्यपाल कहते हैं, गांव बदलेंगे, तो देश जरूर बदलेगा। क्योंकि आज भी हमारा देश गांवों में बसता है। जनसहभागिता ने यह मुहिम संभव थी इसलिए सबके प्रयासों से बदलाव आ रहा है।।

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