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डोकरा कु पाणी देणा -पूर्वजो को जल तर्पण


आदिवासी समाज में नरक चौदस/यम चौदस,दिवाली की अमावश्या और दिवाली के बाद चौदस  का इतना महत्व है की आदिवासी समुदायों के अधिकांश (80%) कबीले इन्ही दिवसों पर  अपने पूर्वजो को सामूहिक रूप से हथियारों से लेस हो मातमी ढ़ोल बजाते हुए किसी नदी/तालाब/बावड़ी में एकत्रित हो जल तर्पण के साथ याद करते है | ये दिवस  इतिहास की किसी बड़ी घटना की और इसारा करते है जब किसी संघर्ष में आदिवासियों ने अपना सामूहिक बलिदान दिया हो |
 इन दिवसों पर  सेकड़ो बार निहत्य आदिवासियों पर दुश्मनों ने आक्रमण कर सब कुछ नष्ट किया,कबीलाई शासन खोना पड़ा फिर भी इस रस्म को आदिवासी आज भी निभाते रहे है | पुणे पंचांग कर्ता देश पांडे ने भी कहा है की अधिकाँश आदिवासी यम चौदस को अपने पूर्वजो को जल तर्पण करते है |जो कबीला इन दिनों पर  जल तर्पण करते है वो फोटो और गोत्र से सहित शेयर करे और किसी के पास इस पर विशेष जानकारी हो तो अवश्य अवगत करावे कुछ भी नहीं तो जय जोहार(प्रकृति की जय) जरुर लिखे

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