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रविवार, 29 अक्तूबर 2017

घोड़ीचराई की लाग बाग़ से ध्यावणा हुए पालगाँव से विस्थापित


#मेदा सिहरा और #भींवा ध्यावणा के इतिहास प्रसिद्द संघर्ष के और म्लेसी कच्छावा के आक्रमण से विस्थापित हुए ध्यावणा समूह में से एक अपने नाना की जागीर ''#पाल गाँव'' (नादोती) में जा बसा | सेकड़ो साल बाद पाल एक बड़ा #मेवासा बन गया | अरावली पर्वत श्रंखला के #आंतरी क्षेत्र में स्थित यह मेवासा राजावत राजपूतो की आँख में किरकिरी था वो इसे नष्ट करना चाहते थे | #गुढ़ाचन्द्रजी के जागीरदार ने पाल गाँव में ''#घोड़ीचराई'' का नया टेक्स लगा दिया पाल के मुखियाओ ने इसे अपना अपमान माना और जागीरदार के लोगो को मार भगाया उसके भाई का सर काट दिया |
बड़ी कुमक आने पर बड़ा संघर्ष छिड़ गया दोनों तरफ के सेकड़ो लोग मारे गए आखिरकर #जागीरदार का भी सर काट दिया | राजा की बड़ी फोज आने की सूचना पर पूरा गाँव उजड़ गया जिसको जहाँ शरण मिली वहां जा बसे | एक परिवार के तीन भाइयो में से सबसे बड़ा गाँव-#गढ़ीपट्टी-200 घर (महवा,दौसा),उससे छोटा अपने ससुराल #रायसेना के कोटवालो के चले गया वहां #गढ़खेडा(200घर) में बसावट की | एक अन्य परिवार से एक भाई गाँव-#सरिया (रामगढ़ पचवारा दौसा) दूसरा #सन्वासा (लालसोट) तीसरा गाँव-#ठेकड़ा-200 घर (चौथ का बरवाडा) में जा बसा |एक अन्य #बरदाला में जाकर बास किया | शोषण की ऐसी घटना जिससे विस्थापन हुआ हो शेयर करे

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