बिन्जारी माता और बारवाल/गोठवाल का मिथक - MeenaSamaj

Breaking

Post Top Ad

रविवार, 29 अक्तूबर 2017

बिन्जारी माता और बारवाल/गोठवाल का मिथक


वर्तमान चौथ का बरवाडा क्षेत्र में घने जंगल में चौरू व पचाला, मीणा आदिवासियों के प्रमुख स्थल थे जो अभी गाँव है इस क्षेत्र को प्राचीन काल में "बाड़बाड़ा" नाम से भी जाना जाता था | जो अब बरवाडा कहलाता है | चौरू गाँव में मिली प्रतिभा गाँव के नाम से ''चौरू माता'' कहलाई फिर पचाला में स्थापित हुई और चौरू से अपभ्रंश हो ''चौथ माता'' हो गई | इसे ''बिनजारी'' माता भी कहते है बिन्जारी गाँव भी चौथ माता के पहाड़ की जड़ में है हो सकता है यह गाँव माता के नाम से ही बसा हो यहाँ पहले गोठवाल/बारवाल रहते हो और ताज़ी बाद में आकार बस गए होंगे और गोठवाल/बारवाल गोत्र की कुलदेवी भी बिन्जारी माता ही है |
इन गोत्रो का एक गाँव निवाई तहसील में चौरू का पूरा (चौरपूरा )भी है लगता इस गाँव का नाम प्राचीन चौरू गाँव की स्मृति में इस गोत्र वालो ने रखा हो | चूँकि यह क्षेत्र बाड़बड़ा कहलाता था अपभ्रंश हो ''बरवाड़ा'' कहलाया और यह क्षेत्र ''चौथ का बरवाडा'' कहा जाणे लगा | बरवाडा से बारवाल शब्द की साम्यता है |हो सकता है इस क्षेत्र के नाम से बारवाल गोत्र बना हो और गोठ गाँव बसाने से गोठवाल भी कहे जाने लगे हो | चिन्तन करे और विचार रखे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Top Ad