Join Our Tribal Meena Samaj Facebook Group!

बाण गंगा किनारे बसा सानकोटड़ा,चेडवाल गोत्र का निकास


पूर्व सरपंच मुंडियाखेड़ा (सिकराय,दौसा) श्री #बद्रीप्रसाद जी ने बताया की #चेडवाल गोत्र का निकास सान कोटड़ा (जमवारामगढ़) से है वहां से गेंगु राम जी ने आकर 1000 साल पहले प्राचीन #कोलगाँव (घूमना) के क्षेत्र में मेवासा बसाया मेवासा उनके नाम से #गैरोजी कहलाया वहां से लगभग 1310 ई० में #मुंडियाखेडा बसा उस गाँव में से 10-12 गाँव बसे जिनमे मेररा (मेरडा)(टोडाभीम),मीणापाड़ा(बसवा),हिंगि और बिंदरवाला(सिकराय) प्रमुख है | यह गोत्र जयपुर,टोंक, दौसा और सवाईमाधोपुर की कई तहसीलों में पाया जाता है | #दतुली (बौंली सवाईमाधोपुर) भी एक प्रमुख गाँव रहा है | यहाँ से निकल कर #जगसरा (निवाई टोंक),#कुशलपुरा (कोटखावादा जयपुर ) बसा |गोतम मीणा मोटर साइकल चालक ''लिम्का बुक रिकोर्डधारी ने सान कोटड़ा के सम्बन्ध में बताया की वर्तमान मातासुला के पास ''प्राचीन #ब्याड़'' मेवासा है यहाँ से निकलने वाले #ब्याड़वाल कहलाये फिर दांतलगढ़ बसाया यह विख्यात मेवासा रहा |
यहाँ के इशरा ब्याड़वाल ने दांतल के पास ही दो पहाड़ो के बीच संवत 1300 में घाटा बसाया जिसे #इशोद्याघाटा कहा गया |फिर उसके वंसज #रेवडा (सती चबूतरा) आकर बसे कई पीढ़ी बाद वहां से उजड़ होने पर वर्तमान करीब 4-5 सौ साल पहले ''#सानकोटड़ा '' आकर बसे संवत 1820 में सायपुर राजपूतो की जागीर कायम हुई किसी बात को लेकर सान कोटड़ा के ब्याड़वालो और राजपूतो में ठन गई |संवत 1842 ब्याड़ यहाँ से उजड़ हुआ 27 साल बाद पुनः बसा | यहाँ यह स्पष्ट किया जा सकता है की चेडवाल या तो #दांतलगढ़ से गए है या #इशोद्याघाटा इसे अब सान कोटड़ा कहते है सान कोटड़ा से दांतलगढ़ 5 किमी,घाटा 2 किमी, #ब्याड़ 15 किमी और #बाणगंगा किनारा 10 किमी है | अब भी हमें सान कोटड़ा के इतिहास को और तलासना है इसमें सहयोग करे |-

No comments:
Write comments