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Tribal News

रविवार, 29 अक्तूबर 2017

कहानी एक निराले चोर की

यह टोडाभीम के एक गांव की कहानी है यह बहुत खूबसूरत पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ गाँव हैं,  अब से बहुत पहले ही गांव में एक सरकारी स्कूल थायह कोई आठवीं क्लास तक का स्कूल था,उस वक्त इस स्कूल की बड़ी बदहाल हालत थी कुछ कमरे थे बाकी क्लासें पेड़ों के नीचे चला करती थी, गाँव वाले भी पढ़ाईमें कोई खास रुचि नहीं लेते थेबस ऐसे ही मानो कि, भगवान के भरोसे चल रहा था ।
ऐसा चोर जो सब बनना चाहेगे और हर कोई पसंद करेगा
तभी स्कूल में एक मास्टर आया,नाम तो याद नहीं.....सब मास्टर जी ही कहते थे ... उन्होंने देखा स्कूल के हालात बहुत खराब है गांव वाले कोई रुचि नहीं ले रहे हैं तो इन्होंने स्कूल में सुधार के प्रयास चालू किए, गांव वालों को समझाया, लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली खैर ऐसे ही चलता रहा
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लेकिन मास्टरजी ने प्रशासन की मदद से स्कूल को10वी तक का करवा दिया था ,कुछ सुधार भी हुये तभी मास्टर जी का ट्रांसफर हो गया और स्कूल के हालत फिर से वही बदतर हो गए तो गांव वालों को मास्टर जी की कमी महसूस होने लगी तो गांव वाले कलेक्टर से मिलकर मास्टर जी की पोस्टिंग दोबारा से उसी स्कूल में करवा लाये कुछ दिनों बाद मास्टर जी का प्रमोशन हो गया अब स्कूल के हेडमास्टर बन गए थेगांव वाले भी अब उनका सहयोग करने लगे धीरे धीरे स्कूल में आर्थिक सहयोग आने लगाकिसी ने पंखा दिया तो किसी ने बिजली की व्यवस्था करवा दी इस तरह गांव के लोग जागरुक होने लगे इस तरह गांव के सभी लोगों ने मिलकर स्कूल की बिल्डिंग को मैं भी बहुत बढ़िया बनवा दिया एक तरह से स्कूल पूरी तरह बदलने लग गया था पानी का बोरिंग भी स्कूल के अंदर ही बनवा दिया गया गांव वाले वाले भी खुश रहने लगे
और स्कूल में एडमिशन भी बढ़ने लगे थेएक अधिकारी थे गांव के,उन्होंने अब तो स्कूल में ठंडे पानी के लिए कूलर भी लगवा दिया था और धीरे-धीरे स्कूल में सब काम होने लग गए  गांव वालों ने मिलकर कोई  25 लाख , 30 लाख के काम करवा दिएअब स्कूल में प्राइवेट स्कूलों की तरह सभी सुविधाएं हो गई थी
सभी क्लासों में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए थे
हेड मास्टर के कमरे में TV और एक अधिकारियों जैसी सब सुविधाएं हो गई थी कुल मिलाकर स्कूल बहुत बढ़िया चल रहा थासभी गांव वाले बहुत खुश थे
  एक दिन की बात है सर्दियों के दिन थे गांव का बाबा घासीराम जो रोज सुबह 4:00 बजे उठकर नहाने जाता था और बालाजी के मंदिर में पूजा करता था यह बालाजी का मंदिर स्कूल से आगे नाले के ऊपर गांव से बाहर था बाबा घासीराम सुबह 4:00 बजे उठा अपनी बीड़ी माचिस निकाले कुर्ता से और बीड़ी पीते पीते स्कूल की चारदीवारी के पास से गुजर रहा था तो उसे स्कूल के ऑफिस से कुछ खटखट की अजीब सी आवाज आ रही थी
उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वह अंदर टंकी पर जाकर नहाने की तैयारी करने लगा लेकिन उस कमरे के पास से आवाज अभी भी आ रही थी तो उसे शक हो गया कहीं हो ना होस्कूल के अंदर कोई चोर घुस गए हो
और स्कूल से महंगे TV, फ्रिज और सामान की चोरी तो नहीं कर रहेबाबा तुरंत कपड़े पहन कर वापस गांव में चला गयाऔर 2-3 ग्राम वासियों को जगा कर अपनी बात बताईतो थोड़ी देर में 10-12 युवा डंडे लेकरऔर स्कूल की तरफ आने के लिए तैयार हो गएउन्होंने स्कूल में आकर देखा तोआवाज तो अभी भी आ रही थी लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था ,सब कहने लगे कि चोर होगा तो आज छोड़ेंगे नहीं  मार डालेंगे
लेकिन आवाज ऑफिस के पीछे के बाथरूम से आ रही थीवहां बहुत अंधेरा थाकुछ नजर नहीं आ रहा थालेकिन गांव वाले धीरे-धीरे उधर पहुंच गए तोवहां एक कोने परछाई सी नजर आईसमझ में नहीं आया कि इतनी ठंडी रात को यह कौन क्या कर रहा है तो उन्होंने अपने मोबाइल की टॉर्च जला कर देखा पीछे से गांव  वाले चिल्लारहे थेकि डंडे से मारो चोर भाग ना पाए

  उन्होंने टॉर्च जला कर देखा तो उनकी देखकर आंखें फटी रह गईये तो स्कूल के हेडमास्टर जी थे
जो स्कूल की लेटरिंग और बाथरूम की सफाई कर रहा थे गांव वाले बोलेइस सब की क्या जरूरत थी
और इतनी रात को सर्दी में इसके लिए तो चपरासी है
लेकिन इस सेवाभाव से गांव वाले बहुत खुश हुए और हेड मास्टर जी और स्कूल के लिए और भी ज्यादा सहयोग करने लगेयह हेड मास्टर जीऔर कोई नहीं
ग्राम नांगल पहाडी के प्रधानाचार्य
श्री कैलाश चंद्र मीणा जी ही थे
जिनके इसी सेवाभाव की वजह सेउनकी इसी लगन की वजह से स्कूल आगे बढ़ाकई बेहतरीन कार्य हुये
और उन्हें हाल ही में राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गयाऔर भी बहुत सम्मान मिल  चुके हैं
और हम ईश्वर से उम्मीद करते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयास इसी तरह जारी रहेंगे

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