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कहानी एक निराले चोर की

यह टोडाभीम के एक गांव की कहानी है यह बहुत खूबसूरत पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ गाँव हैं,  अब से बहुत पहले ही गांव में एक सरकारी स्कूल थायह कोई आठवीं क्लास तक का स्कूल था,उस वक्त इस स्कूल की बड़ी बदहाल हालत थी कुछ कमरे थे बाकी क्लासें पेड़ों के नीचे चला करती थी, गाँव वाले भी पढ़ाईमें कोई खास रुचि नहीं लेते थेबस ऐसे ही मानो कि, भगवान के भरोसे चल रहा था ।
ऐसा चोर जो सब बनना चाहेगे और हर कोई पसंद करेगा
तभी स्कूल में एक मास्टर आया,नाम तो याद नहीं.....सब मास्टर जी ही कहते थे ... उन्होंने देखा स्कूल के हालात बहुत खराब है गांव वाले कोई रुचि नहीं ले रहे हैं तो इन्होंने स्कूल में सुधार के प्रयास चालू किए, गांव वालों को समझाया, लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली खैर ऐसे ही चलता रहा
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लेकिन मास्टरजी ने प्रशासन की मदद से स्कूल को10वी तक का करवा दिया था ,कुछ सुधार भी हुये तभी मास्टर जी का ट्रांसफर हो गया और स्कूल के हालत फिर से वही बदतर हो गए तो गांव वालों को मास्टर जी की कमी महसूस होने लगी तो गांव वाले कलेक्टर से मिलकर मास्टर जी की पोस्टिंग दोबारा से उसी स्कूल में करवा लाये कुछ दिनों बाद मास्टर जी का प्रमोशन हो गया अब स्कूल के हेडमास्टर बन गए थेगांव वाले भी अब उनका सहयोग करने लगे धीरे धीरे स्कूल में आर्थिक सहयोग आने लगाकिसी ने पंखा दिया तो किसी ने बिजली की व्यवस्था करवा दी इस तरह गांव के लोग जागरुक होने लगे इस तरह गांव के सभी लोगों ने मिलकर स्कूल की बिल्डिंग को मैं भी बहुत बढ़िया बनवा दिया एक तरह से स्कूल पूरी तरह बदलने लग गया था पानी का बोरिंग भी स्कूल के अंदर ही बनवा दिया गया गांव वाले वाले भी खुश रहने लगे
और स्कूल में एडमिशन भी बढ़ने लगे थेएक अधिकारी थे गांव के,उन्होंने अब तो स्कूल में ठंडे पानी के लिए कूलर भी लगवा दिया था और धीरे-धीरे स्कूल में सब काम होने लग गए  गांव वालों ने मिलकर कोई  25 लाख , 30 लाख के काम करवा दिएअब स्कूल में प्राइवेट स्कूलों की तरह सभी सुविधाएं हो गई थी
सभी क्लासों में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए थे
हेड मास्टर के कमरे में TV और एक अधिकारियों जैसी सब सुविधाएं हो गई थी कुल मिलाकर स्कूल बहुत बढ़िया चल रहा थासभी गांव वाले बहुत खुश थे
  एक दिन की बात है सर्दियों के दिन थे गांव का बाबा घासीराम जो रोज सुबह 4:00 बजे उठकर नहाने जाता था और बालाजी के मंदिर में पूजा करता था यह बालाजी का मंदिर स्कूल से आगे नाले के ऊपर गांव से बाहर था बाबा घासीराम सुबह 4:00 बजे उठा अपनी बीड़ी माचिस निकाले कुर्ता से और बीड़ी पीते पीते स्कूल की चारदीवारी के पास से गुजर रहा था तो उसे स्कूल के ऑफिस से कुछ खटखट की अजीब सी आवाज आ रही थी
उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वह अंदर टंकी पर जाकर नहाने की तैयारी करने लगा लेकिन उस कमरे के पास से आवाज अभी भी आ रही थी तो उसे शक हो गया कहीं हो ना होस्कूल के अंदर कोई चोर घुस गए हो
और स्कूल से महंगे TV, फ्रिज और सामान की चोरी तो नहीं कर रहेबाबा तुरंत कपड़े पहन कर वापस गांव में चला गयाऔर 2-3 ग्राम वासियों को जगा कर अपनी बात बताईतो थोड़ी देर में 10-12 युवा डंडे लेकरऔर स्कूल की तरफ आने के लिए तैयार हो गएउन्होंने स्कूल में आकर देखा तोआवाज तो अभी भी आ रही थी लेकिन कोई नजर नहीं आ रहा था ,सब कहने लगे कि चोर होगा तो आज छोड़ेंगे नहीं  मार डालेंगे
लेकिन आवाज ऑफिस के पीछे के बाथरूम से आ रही थीवहां बहुत अंधेरा थाकुछ नजर नहीं आ रहा थालेकिन गांव वाले धीरे-धीरे उधर पहुंच गए तोवहां एक कोने परछाई सी नजर आईसमझ में नहीं आया कि इतनी ठंडी रात को यह कौन क्या कर रहा है तो उन्होंने अपने मोबाइल की टॉर्च जला कर देखा पीछे से गांव  वाले चिल्लारहे थेकि डंडे से मारो चोर भाग ना पाए

  उन्होंने टॉर्च जला कर देखा तो उनकी देखकर आंखें फटी रह गईये तो स्कूल के हेडमास्टर जी थे
जो स्कूल की लेटरिंग और बाथरूम की सफाई कर रहा थे गांव वाले बोलेइस सब की क्या जरूरत थी
और इतनी रात को सर्दी में इसके लिए तो चपरासी है
लेकिन इस सेवाभाव से गांव वाले बहुत खुश हुए और हेड मास्टर जी और स्कूल के लिए और भी ज्यादा सहयोग करने लगेयह हेड मास्टर जीऔर कोई नहीं
ग्राम नांगल पहाडी के प्रधानाचार्य
श्री कैलाश चंद्र मीणा जी ही थे
जिनके इसी सेवाभाव की वजह सेउनकी इसी लगन की वजह से स्कूल आगे बढ़ाकई बेहतरीन कार्य हुये
और उन्हें हाल ही में राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गयाऔर भी बहुत सम्मान मिल  चुके हैं
और हम ईश्वर से उम्मीद करते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयास इसी तरह जारी रहेंगे

गर्व है ऐसे गाँव में जन्म लेने पर...


इस नेक कार्य का हिस्सा बनने का सौभाग्य मुझे भी मिला है ।
दोस्तों हमारे गाँव के युवाओं का सपना था जो बाद में सभी का बन गया कि हमारा गाँव एक आदर्श गांव बने जिसमें बुराई नाम की चीज बिलकुल नही हो । इसी क्रम में 8 अगस्त 2017 को एक आदर्श गाँव करेल नाम से व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया गया जिसमे गाँव से दूर देश के कोने कोन में विभिन्न विभागों में सरकार को अपनी सेवाए दे रहे सभी अधिकारी,कर्मचारी,छात्रों और ग्रामीण को जोड़ा गया । गाँव में व्याप्त अनेक कुरुतिया और समस्याएं सामने आई जिसमे सर्वप्रथम गाँव में शिक्षा की हालत सुधारने के लिए विद्यालय विकास के काम करने का निर्णय लिया ताकि जिन समस्याओ का सामना हमने किया वो हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ी को नही करना पड़े और गाँव में ही शहरो की प्राइवेट स्कूल से भी बेहतर शिक्षा मिल सके।
दोस्तों आप विश्वास नही करोगे लेकिन 1 महीने के अंदर सभी के सहयोग से बिना एक दूसरे से मिले केवल व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से विद्यालय विकाश हेतु 22 लाख 75 हजार की घोषणाए हुई जिसमें से 20 लाख 30 हजार रुपए की राशि नेट बैंकिंग, नकदी आदि माध्यम से एकत्रित कर रमसा को प्रस्ताव बनाकर भेज दी जिसमे राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजनान्तर्गत 60 % राशि सरकार की तरफ से दी जायेगी । इस तरह कुल मिलाकर 50 लाख 75 हजार रुपए के विकास कार्यो के लिए जल्दी ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जायेगी।


दीपावली पर गांव में हुए ग्रुप के स्नेह मिलन समारोह में 11 सदस्ययी कार्यकारिणी भी गठित की गई है।
ग्रुप के सुचारू रूप से संचालन के लिए नियम बनाए गए है । जल्दी ही इसका रजिस्ट्रेशन भी करवाया जायेगा।
दोस्तों यह pay back to society का बेहतरीन उदाहरण है
आप भी अपने अपने गाँव में इस तरह का प्रयास कर सकते है।
मुनिराज मीणा करेल

बिन्जारी माता और बारवाल/गोठवाल का मिथक


वर्तमान चौथ का बरवाडा क्षेत्र में घने जंगल में चौरू व पचाला, मीणा आदिवासियों के प्रमुख स्थल थे जो अभी गाँव है इस क्षेत्र को प्राचीन काल में "बाड़बाड़ा" नाम से भी जाना जाता था | जो अब बरवाडा कहलाता है | चौरू गाँव में मिली प्रतिभा गाँव के नाम से ''चौरू माता'' कहलाई फिर पचाला में स्थापित हुई और चौरू से अपभ्रंश हो ''चौथ माता'' हो गई | इसे ''बिनजारी'' माता भी कहते है बिन्जारी गाँव भी चौथ माता के पहाड़ की जड़ में है हो सकता है यह गाँव माता के नाम से ही बसा हो यहाँ पहले गोठवाल/बारवाल रहते हो और ताज़ी बाद में आकार बस गए होंगे और गोठवाल/बारवाल गोत्र की कुलदेवी भी बिन्जारी माता ही है |
इन गोत्रो का एक गाँव निवाई तहसील में चौरू का पूरा (चौरपूरा )भी है लगता इस गाँव का नाम प्राचीन चौरू गाँव की स्मृति में इस गोत्र वालो ने रखा हो | चूँकि यह क्षेत्र बाड़बड़ा कहलाता था अपभ्रंश हो ''बरवाड़ा'' कहलाया और यह क्षेत्र ''चौथ का बरवाडा'' कहा जाणे लगा | बरवाडा से बारवाल शब्द की साम्यता है |हो सकता है इस क्षेत्र के नाम से बारवाल गोत्र बना हो और गोठ गाँव बसाने से गोठवाल भी कहे जाने लगे हो | चिन्तन करे और विचार रखे।

डोकरा कु पाणी देणा -पूर्वजो को जल तर्पण


आदिवासी समाज में नरक चौदस/यम चौदस,दिवाली की अमावश्या और दिवाली के बाद चौदस  का इतना महत्व है की आदिवासी समुदायों के अधिकांश (80%) कबीले इन्ही दिवसों पर  अपने पूर्वजो को सामूहिक रूप से हथियारों से लेस हो मातमी ढ़ोल बजाते हुए किसी नदी/तालाब/बावड़ी में एकत्रित हो जल तर्पण के साथ याद करते है | ये दिवस  इतिहास की किसी बड़ी घटना की और इसारा करते है जब किसी संघर्ष में आदिवासियों ने अपना सामूहिक बलिदान दिया हो |
 इन दिवसों पर  सेकड़ो बार निहत्य आदिवासियों पर दुश्मनों ने आक्रमण कर सब कुछ नष्ट किया,कबीलाई शासन खोना पड़ा फिर भी इस रस्म को आदिवासी आज भी निभाते रहे है | पुणे पंचांग कर्ता देश पांडे ने भी कहा है की अधिकाँश आदिवासी यम चौदस को अपने पूर्वजो को जल तर्पण करते है |जो कबीला इन दिनों पर  जल तर्पण करते है वो फोटो और गोत्र से सहित शेयर करे और किसी के पास इस पर विशेष जानकारी हो तो अवश्य अवगत करावे कुछ भी नहीं तो जय जोहार(प्रकृति की जय) जरुर लिखे

हाड़ोती के अरहोड़ा/आरोड़ा/औराडा/ओन्हाडा गोत्र


समुदाय में हाड़ोती क्षेत्र में ''#अरहोड़ा ''भी एक प्राचीन और प्रमुख गोत्र (अटक) है | इस गोत्र में आट #सीतलामाता / #चौथमाता को अपनी आराध्य और ''#आशापाला'' के वृक्ष को कुल वृक्ष (#ध्याड़ी) माना जाता है |इस गोत्र का निकास बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील  की ग्राम पंचायत-उतरना के गाँव-''#बूदेल'' को माना जाता है | इसी ग्राम पंचायत में गाँव-छप्पनपूरा (600), डगारिया(790) में भी इसी गोत्र के लोग रहते है |यह गोत्र जिला बूंदी की इंद्रगढ़, नेनवा, हिण्डोली,बूंदी में काफी संख्या में है | तहसील-नेनवा-गाँव-बिजल्वा (400), गाडरया (380), पीपरवाला (500), संग्राम गंज (350), नीम खेड़ा (340) तहसील- हिण्डोली-गाँव-पापराला (800) तहसील-बूंदी में गाँव-गणपतपूरा (300), आमली (500) इनके अलावा यह गोत्र भीलवाडा की जहाजपुर तहसील के भी कई गाँवो में है उनमे प्रमुख है गाँव-उलेला (500), टीटोडा माफ़ी (600), टीटोडी (200),सुन्दर गढ़ (490), शेरपुरा(450), जूण की झोपड्या (300), इसके अलावा अजमेर की केकड़ी तहसील के गाँव -घाटयाली में कुछ परिवार रहते है | 
इस गोत्र का पालयन हाड़ोती क्षेत्र के अलावा बांगड़ क्षेत्र में भी हुआ | #वागड़ क्षेत्र के जिला डूंगरपुर की तहसील सीमल वाडा में ''#भाणासीमाल'' अरहोड़ा मिनाओ का एक बड़ा गाँव है |

कहा जाता है कि सेकड़ो साल पूर्व भाणा अरहोड़ा ने हाड़ोती से जाकर यह गाँव बसाया था इस गाँव की वर्तमान आबादी 1000 के आस पास है यहाँ का मुखिया (गमेती) #धुला अरहोड़ा है |

किसी के पास इस गोत्र का संघर्ष,पलायन और गाँवो की जानकारी हो तो अवश्य शेयर करे

घोड़ीचराई की लाग बाग़ से ध्यावणा हुए पालगाँव से विस्थापित


#मेदा सिहरा और #भींवा ध्यावणा के इतिहास प्रसिद्द संघर्ष के और म्लेसी कच्छावा के आक्रमण से विस्थापित हुए ध्यावणा समूह में से एक अपने नाना की जागीर ''#पाल गाँव'' (नादोती) में जा बसा | सेकड़ो साल बाद पाल एक बड़ा #मेवासा बन गया | अरावली पर्वत श्रंखला के #आंतरी क्षेत्र में स्थित यह मेवासा राजावत राजपूतो की आँख में किरकिरी था वो इसे नष्ट करना चाहते थे | #गुढ़ाचन्द्रजी के जागीरदार ने पाल गाँव में ''#घोड़ीचराई'' का नया टेक्स लगा दिया पाल के मुखियाओ ने इसे अपना अपमान माना और जागीरदार के लोगो को मार भगाया उसके भाई का सर काट दिया |
बड़ी कुमक आने पर बड़ा संघर्ष छिड़ गया दोनों तरफ के सेकड़ो लोग मारे गए आखिरकर #जागीरदार का भी सर काट दिया | राजा की बड़ी फोज आने की सूचना पर पूरा गाँव उजड़ गया जिसको जहाँ शरण मिली वहां जा बसे | एक परिवार के तीन भाइयो में से सबसे बड़ा गाँव-#गढ़ीपट्टी-200 घर (महवा,दौसा),उससे छोटा अपने ससुराल #रायसेना के कोटवालो के चले गया वहां #गढ़खेडा(200घर) में बसावट की | एक अन्य परिवार से एक भाई गाँव-#सरिया (रामगढ़ पचवारा दौसा) दूसरा #सन्वासा (लालसोट) तीसरा गाँव-#ठेकड़ा-200 घर (चौथ का बरवाडा) में जा बसा |एक अन्य #बरदाला में जाकर बास किया | शोषण की ऐसी घटना जिससे विस्थापन हुआ हो शेयर करे

बाण गंगा किनारे बसा सानकोटड़ा,चेडवाल गोत्र का निकास


पूर्व सरपंच मुंडियाखेड़ा (सिकराय,दौसा) श्री #बद्रीप्रसाद जी ने बताया की #चेडवाल गोत्र का निकास सान कोटड़ा (जमवारामगढ़) से है वहां से गेंगु राम जी ने आकर 1000 साल पहले प्राचीन #कोलगाँव (घूमना) के क्षेत्र में मेवासा बसाया मेवासा उनके नाम से #गैरोजी कहलाया वहां से लगभग 1310 ई० में #मुंडियाखेडा बसा उस गाँव में से 10-12 गाँव बसे जिनमे मेररा (मेरडा)(टोडाभीम),मीणापाड़ा(बसवा),हिंगि और बिंदरवाला(सिकराय) प्रमुख है | यह गोत्र जयपुर,टोंक, दौसा और सवाईमाधोपुर की कई तहसीलों में पाया जाता है | #दतुली (बौंली सवाईमाधोपुर) भी एक प्रमुख गाँव रहा है | यहाँ से निकल कर #जगसरा (निवाई टोंक),#कुशलपुरा (कोटखावादा जयपुर ) बसा |गोतम मीणा मोटर साइकल चालक ''लिम्का बुक रिकोर्डधारी ने सान कोटड़ा के सम्बन्ध में बताया की वर्तमान मातासुला के पास ''प्राचीन #ब्याड़'' मेवासा है यहाँ से निकलने वाले #ब्याड़वाल कहलाये फिर दांतलगढ़ बसाया यह विख्यात मेवासा रहा |
यहाँ के इशरा ब्याड़वाल ने दांतल के पास ही दो पहाड़ो के बीच संवत 1300 में घाटा बसाया जिसे #इशोद्याघाटा कहा गया |फिर उसके वंसज #रेवडा (सती चबूतरा) आकर बसे कई पीढ़ी बाद वहां से उजड़ होने पर वर्तमान करीब 4-5 सौ साल पहले ''#सानकोटड़ा '' आकर बसे संवत 1820 में सायपुर राजपूतो की जागीर कायम हुई किसी बात को लेकर सान कोटड़ा के ब्याड़वालो और राजपूतो में ठन गई |संवत 1842 ब्याड़ यहाँ से उजड़ हुआ 27 साल बाद पुनः बसा | यहाँ यह स्पष्ट किया जा सकता है की चेडवाल या तो #दांतलगढ़ से गए है या #इशोद्याघाटा इसे अब सान कोटड़ा कहते है सान कोटड़ा से दांतलगढ़ 5 किमी,घाटा 2 किमी, #ब्याड़ 15 किमी और #बाणगंगा किनारा 10 किमी है | अब भी हमें सान कोटड़ा के इतिहास को और तलासना है इसमें सहयोग करे |-

ग्रामीण विकास की नई दिशाएं

सरकार द्वारा आर्थिक रुप से कमजोर बेरोजगार व किसानों के लिए कई प्रकार की योजनाएं समय-समय पर चलाई जाती हैं लेकिन जानकारी के अभाव में इन योजनाओं का पूर्ण लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाता है कई बार तो पढ़े लिखे नौजवान लोगों को भी इन योजनाओं की जानकारी नहीं रहती इसी बात को ध्यान में रखते हुए Naresh Pal Meena जी तथा उनके टीम के अथक प्रयासों के द्वारा आने वाली तारीख 27 अक्टूबर को उप जिला कलेक्टर कार्यालय टोडाभीम के समीप "ग्रामीण विकास की नवीन दिशाएं" कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है जिसमें ग्रामीण विकास की योजनाओं के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी के साथ साथ उन योजनाओं का लाभ उठाने में आ रही दिक्कतों का समाधान भी किया जाएगा
Pay Back To Society
इस कार्यक्रम में जिला कलेक्टर उप जिला कलेक्टर सहित विभिन्न योजनाओं से संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों,सचिवों, सरपंचों को आमंत्रित किया गया है जो विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे इस कार्यक्रम में आप सभी सादर आमंत्रित हैं कार्यक्रम में पधारकर विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें तथा योजनाओं का लाभ उठाएं अपने साथ-साथ अन्य लोगों को भी जानकारी देकर योजनाओं से लाभान्वित करें

लकवाल/लकवाड/नकवाल/आमट गोत्र मीणा माइक्रो हिस्ट्री

मीणा समुदाय के 5200 अटकों (गोत्रों) में लकवाल भी एक है यह मुख्यतः दौसा,सवाईमाधोपुर और करोली में पाया जाता है |इस गोत्र का सबसे बड़ा गाँव -खंडीप तह० गंगापुर जिला-सवाईमाधोपुर को माना जाता है इस गाँव में एक पीर बाबा का स्थान है ,तालाब किनारे एक प्राचीन चामुडा का मन्दिर भी है |इसी गाँव के श्री घासी राम मीणा को खेत जोतते समय एक पुराने पिलु के पेड़ के निचे मूर्ति मिली जिसे धरती माता के रूप में स्थापित कर थानक बना दिया है,काफी बड़ा खंडिप बांध भी है गंभीरी नदी किनारे पांचना बाँध इस गाँव के बिलकुल पास है | यह गाँव काफी सम्पन्न और दिलेर रहा है |पहलवानी इस गाँव का शौक है एक कुस्ती दंगल भी बना हुआ है | इस गाँव से कई गाँव सिकराय दौसा में भी जाकर बसे है | कुल वृक्ष -पीपल और कुलदेवी ज्वाला जोबनेर है पर घटवासन माता को भी आराध्य देवी मानते है | दौसा में लांका एक प्राचीन गाँव भी है जो शब्द साम्यता रखता है | इसी गाँव से इस गोत्र का निकास माना जाता है लांका से लकवाल शब्द अस्तित्व में आया | लकवाल का मतलब लांका के प्राचीन निवासियों से है | यह भी कहा जाता है लांका से आकर आम काट आमाखेडा (सिकराय दौसा ) बसाया तब से आमट कहलाये | बारां की अटरू तहसील के गाँव आंटूण और भैसावा में आमठ गोत के मीणा रहते है |आमठ गोत भी लकवाल ही है | आमाखेडा से निकले दो भाइयो में से एक ने सायपूरा और दुसरे ने उक्रुंद बसाया | उकरूंद के स्व लक्ष्मी चंद पटेल प्रसिद्द संवत् ज्ञाता और लोक पद गायक हुए है |श्री लक्ष्मी चंद पटैल ( लिखमी पटैल ) जग जाहिर लोक गायक हुए है । उनकी कीर्ति पताका से तत्कालाएन प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी भी बहुत प्रभावित हुई थी ।
 यह गाँव भी कई बार उजड़ा और बसा है | सवाईमाधोपुर में गाँव खंडिप,फुलवाडा,बिछोछ | दौसा में आमटेरा, मालावास, कोरदा, गोकुल पूरा नालावास, उकरूद, सायपुर-चूर खेडा ,सिकरी,राणोली, निकतपूरी,टोरडा,सहसपुर और गुमानपूरा इस गोत्र के मुख्य गाँव है | करोली में नांद खुर्द तुमापुरा,तिमावा,और मंड़ाई में भी लकवाल/नकवाल रहते है | ये लोग दुसरे प्रदेशो में भी गए है जैसे उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र | महाराष्ट्र वाले तो अपने वजूद को ही भूल गए अब कुछ लोग जानने लगे है | खंडिप गंगापुर के उदय सिंह लकवाल वैजापुर /बीजापुर के युद्ध में वीरगति पाई थी जागा उनके परिवार का महाराष्ट्र से संवत 1730 में आना बताते है जिनको उस गाँव में आज भी मराठा थोक कहते है |
 लकवाल गोत मिणा महाराष्ट् मे गाँव-पाचपिरबाडी तह, गंगापुर, कान्होरी तह, फुलबंरी जिला औरंगाबाद महाराष्ट्र में आज भी रहते है |,लकवाल गोत बड़ा(280) तह भड़गाँव, गाँव - बहाल (500)त. चालीसगाव जि.जलगाव पुरा गाव बसा है.वहा के सुरेश भाई लकवाल समाज के जिला परमुख है इस गोत्र के गाँव,कोई घटना,कोई पलायन व अन्य कोई जानकारी हो तो अवश्य शेयर करे ताकि दुर्लभ जानकारी सभी तक पहुंचाई जा सके |

चेडवाल गोत्र की मीणा माइक्रो हिस्ट्री

मान्यता है की चेडवाल गोत्र भी ध्यावणा,झरवाल,और ब्याड़वाल गोत्र का #पैगभाई है पर अभी किसी ने पुख्ता जानकारी नहीं दी | इस गोत्र का इतिहास भी उक्त गोत्रो से ही जुड़ा होना चाहिए खोज यह करनी है अलग गोत्र के रूप में अस्तित्व में कब और कैसे आया | क्या ये गोत्र एक वंश से पैदा होने के कारण भाई भाई ने नाते आपस में रिश्तेदारी नहीं करते या करने लग गए | #चेडवाल शब्द से प्रतीत होता है यह गोत्र किसी गाँव के नाम से अस्तित्व में आया होगा स्पष्ट तो आपके सहयोग से हो पायेगा | गाँव जगसारा (1200) तहसील निवाई टोंक में भी यह गोत्र है प्रसिद्द लोक गायक श्री नारायण जगसरा जी ने बताया की हमारे गोत्र का निकास सर मथुरा से है और धोलपुर-भरतपुर में 12 गाँव है वहां से बाण नदी के तट पर बसे महंगा भाटा गाँव में आये वहां से जगसरा में आकर बसे है | हमारे पूर्वज किसी धार्मिक यात्रा में ब्याड़वाल गोत्र के मुखिया का धर्म भाई बना था इसलिय उस गोत्र को पे भाई मानते है अन्य ध्यावणा सहित सभी गोत्रो में विवाह करते है | कुल देवी घटवासन है | महर तो बाद में मानने लगे है कुलदेवी तो हमारी ही है |
पूर्व सरपंच मुंडिया खेडा श्री बद्रीप्रसाद जी ने बताया की चेडवाल गोत्र का निकास सान कोटड़ा (जमवारामगढ़) से वहां से गेंगु राम जी आकर 1000 साल पहले प्राचीन कोल गाँव (घूमना) के क्षेत्र में मेवासा बसाया मेवासा उनके नाम से गैरोजी कहलाया वहां से लगभग संवत 1310 में मुंडिया खेडा बसा उस गाँव में से 10-12 गाँव बसे जिनमे मेहरा(टोडाभीम),मीणा पाड़ा(बसवा),हिंगि और बिंदरवाला(सिकराय) प्रमुख है | यह गोत्र जयपुर, दौसा और सवाईमाधोपुर की कई तहसीलों में पाया जाता है | सवाईमाधोपुर की तहसील-बौंली के गाँव-दतुली (250), बहनोली (200), हनुमतपूरा (286) एवं तहसील खंडार के गाँव-पादडा बाढ़ (100) जिला दौसा की सिकराय तहसील के गाँव-मिनावाडी (335), रजवास (100), हिंगि (250) तथा जयपुर जिले की सांगानेर तहसील के गाँव-सिरोली (200), तहसील-बस्सी के गाँव-रामपुरा (200), हिम्मतपुरा (500) में तहसील-कोटखावदा के गाँव-कुशलपुरा (300) टोंक जिले की निवाई तहसील में गाँव-जगसरा (500) यह गोत्र है | इसकी खोज में आपके सहयोग की अधिक आवश्यकता है |

हाडोती में डॉ किरोड़ी लाल का शंखनाद

कल दिनांक 26 अक्टूबर 2017 को सपोटरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत हाडोती की बनास नदी से लालसोट विधायक #डॉ_किरोडी_लाल_मीणा के नेतृत्व में एक शंखनाद रोड शो का आयोजन किया जाएगा जिसका प्रमुख मुद्दा पुलिस प्रशासन के द्वारा व कुछ स्थानीय भ्रष्ट राजनेताओं की शह के द्वारा वाहन चालकों से अवैध वसूली की जा रही है उसके खिलाफ बिगुल बजाया जाएगा, हजारों ट्रैक्टर ट्रॉली चालक, डंपर चालक व बजरी खनन से जुड़े हजारों मजदूर शंखनाद रोड शो में शामिल होंगे इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सपोटरा क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने जनसंपर्क किया। व अधिकाधिक संख्या में लोगों से इस आंदोलन में आने का न्योता दिया गया


बजरी खनन से जुड़े हुए मजदूर व ट्रैक्टर चालकों को से जुड़े हुए मुद्दों पर यह दूसरा शंखनाद है इससे पूर्व पिछले 15 सितंबर को #अलवर जिले में भी ऐसा ही एक रोड शो का आयोजन किया गया था वहां पर बजरी वाहन चालको को पुलिस प्रशासन व वन विभाग के अधिकारियों को एक महीने के 20000 रुपये मंथली बन्धी के रूप में देने पड़ते थे लेकिन #डॉ_किरोडीलाल मीणा के नेतृत्व में किए गए शंखनाद के बाद इस अवैध वसूली पर पूरी तरह पाबंदी लग गई है और जिस का यह परिणाम रहा है कि अवैध खनन की आड़ में चलाया जा रहा काला कारोबार पूर्ण रुप से बंद हो गया है, अगर करौली क्षेत्र की जनता आशीर्वाद रहा तो सपोटरा का शंखनाद भी सफल रहेगा और आपकी समस्याओं का समाधान भी पूर्ण रूप से हो जाएगा और गरीब परिवारो को राहत मिल सकेगी।

अतः आप सभी से निवेदन है कि जो भी भाई बन्धु इस शंखनाद में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है वह जरूर जाए और भ्रष्ट पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें,भय भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में #डॉक्टरकिरोडीलालमीणा का साथ दें जिससे गरीब किसान मजदूर छात्रों का भला हो सके ऐसी मैं आप सभी से विनती करता हूं।

सहास और वीरता से भरपूर प्रसिद्द मीणा मेवासी बीलाजी खोड़ा

बीलाजी खोड़ा का #मिनशल का प्रसिद्द मेवासी माना गया है | #बिला जी के तीन लडके हुए 1-#दुदा जी,2-#चाहो जी और 3- #दराज जी और दो पुत्रियाँ हुई | दुदा का पुत्र #कुम्भा द्ताला का मेवासी हुआ अर्थात #दन्ताला बसाया | मेवासा अचरोल के #अचला बागड़ी और चंदवाजी के #चंदा बागड़ी की शादी बिला जी खोड़ा की लडकियों से हुई थी | बिला जी ने कई युद्ध लड़े और विजय पाई | उनकी वीरता के सेकड़ो किस्से आमजन की जबान पर है | उन्होंने #बीलपुर,#बिलोद आदि कई गाँव बसाये | कहा जाता है की चिताणु के अलावा जहाँ भी खोड़ा है वे बिला जी के ही वंश से है | गाँव-#बीलपुर में हालाँकि खोड़ा गोत्र का एक ही घर है पर उस गाँव में बीला जी के कई स्मृति चिन्ह है वहां उनका #थानक भी बना हुआ है | बीला जी पर कुछ अधिक जानकारी जुटाने के मकसद से यह पोस्ट डाली है आपसे सहयोग की अपेक्षा रहेगी -

हमारे बंदे में भी दम है

कितने चाव से देखते हैं TV पर जब हार्दिक पटेल गुजरात को लीड करता हुआ नजर आता है,अल्पेश भाई #गुजरात का हीरो बन जाता है
कल तक जो पाटीदार समाज के लिए लड़ रहे थे आज वह राहुल गांधी के लिए सलाहकार बन जाते हैं सब कहते देखो युवाओं में दम है क्या करिश्मा किया है पटेल नेक्या #हमारे अंदर नहीं है ये सब कुछ करने की हिम्मत क्या हमारे समाज में कोई हुआ नहीं है जो हमारे समाज को, हमारे राज्य की राजनीति को अच्छी तरह से लीड कर सके हम क्यों नहीं हमारे युवाओं को आगे लाते हैं और कोई आगे आता है तो उसका साथ क्यों नहीं देतेकब तक दूर के #ढोल को देखते रहोगे कभी तो अपना खुद का वजूद भी तो बना कर देखो
कभी अपनों का भी तो साथ दे कर देखो मजा तो तब आएगा फिर क्यों ना हम एक साथ होकर नरेश भाई को आगे आने का मौका दें
नरेश भाई के अंदर आपको क्या ऐसी कमी नजर आती है जो आप उनका साथ नहीं दे रहे हैंनरेश भाई खुद पढ़े लिखे युवा है मीणा हॉस्टल में रहे हुए हैं इंग्लिश लिटरेचर से m.a. b.a. है स्टूडेंट राजनीति से जुड़े हुए हैं युवाओं की दिक्कतों को समझते हैं

नरेश भाई खुद किसान के बेटा ही नहीं,खुद भी किसान हैं जो खुद मेहनत करके अपने खेतों की देखभाल करते हैं जुताई करते हैं यहां तक की हाड़ी के रूप में खेतों में काम भी करते हैं फिर क्या ऐसा युवा किसानों की दिक्कत को अच्छे से नहीं समझता होगा उसे किसान की मेहनत और पानी के मोल का अंदाज नहीं होगा क्या फिर क्यों नहीं हम उस का साथ देते हैं
नरेश मीणा कोई VIP परिवार से नहीं है वह भी हमारी तरह का आम आदमी है वह एक आम आदमी की दिक्कतों को अच्छे से समझते हैं गांव में पले-बढ़े हैं गांव में रहते हैं
जयपुर में आज भी किराए के मकान में रहते हैं उनके बच्चे तो क्या वह नहीं समझते होंगे कि बच्चों को पढ़ाई के लिए किराए पर कमरा लेते वक्त कितनी दिक्कत आती है तो फिर क्यों नहीं हम नरेश भाई का साथ देते हैं
नरेश मीणा ने भी बार-बार संघर्ष करके अपनी काबिलियत से लोगों के मुंह से कहलवाया है कि #बंदे में तो दम है
फिर क्यों नहीं हमारा समाज उसका साथ देकर आगे करताक्या हमें हमारा भविष्य सुनहरा नहीं चाहिए
कि हम नहीं चाहते कि हमारे समाज के युवा आगे बढ़े कब तक TV पर हार्दिक पटेल राहुल गांधी और यादवों की फोटो देखते रहेंगे कभी तो अपनों को भी तो आगे करके देखो तभी तो पता चलेगा कि हम में भी दम है और
हमारे बंदे में भी दम है

अलवर में जरायम दादरसी फ़िल्म का प्रमोशन

ऐतिहासिक फ़िल्म "जरायम दादरसी" का अलवर में सर्व समाज द्वारा शानदार प्रमोशन प्रोग्राम आयोजित किया गया। इसमे अलवर डेयरी संघ के चेयरमैन श्री बनाराम मीना और बीजेपी उम्मीदवार श्री मोहित यादव जी ने काफी सहयोग किया। जरायम दादरसी टीम उनका आभार व्यक्त करती है। रिलीजिंग के लिए आर्थिक मदद करने का भी आश्वाशन दिया। मीणा लोक कलाकारों ने भी भाग लिया। अलवर की जनता ने काफी उत्साह दिखाया।
इस प्रोग्राम के आयोजन में अशोक बाबा रामदेव की कार्यकर्ता टीम ने काफी सक्रिय भूमिका निभाई। पूरे अलवर में फ़िल्म के पोस्टर के बड़े बड़े होर्डिंग लगवाए। अशोक जी की टीम को जरायम दादरसी और भूमि श्री पिक्चर्स की तरफ से धन्यवाद। इस प्रोग्राम को देखने के लिए लिंक पर क्लिक करे।

दुनिया में ईमानदारी अभी कायम हैं ।

ईमानदारी की #मिशाल बने भाई Balram Railway Meena
आज रात DMW में कार्यरत बलराम मीना (22 oct) इंटरसिटी से अलवर से अंबाला के लिए आ रहे थे तो रास्ते मे किसी यात्री ने गलती से अपना कीमती Mi का फ़ोन, पर्श जिसमें नगद राशि, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ईडेंटी कार्ड आदि सभी जरूरी कागजात सामिल थे...इनके बैग में रख दिये थे
.. और जब इन्होंने क्वाटर पर आके अपना बैग देखा
तो उसमें ये पर्श और फ़ोन देखकर अचम्भा हुआ..
..तभी उन्हें चंडीगढ़ से सचिन का फोन आया..
.ये उसका ही सामान था...जो उसने अंधेरे में ग़लती से इनके बैग में रख दिया था...उनके घर वालो का भी फ़ोन आ रहा हैं... हमने उन्हें आश्वासन दे दिया कि आप कभी भी पटियाला आकर अपना सारा सामान ले लेना..कोई चिंता मत करो...
फिर दोपहर को सचिन पटियाला पहुँच गया और हमने जरूरी तस्दीक करके उसे उसका सामान लौटा दिया, जिसकी कीमत कोई 20 हज़ार होगी
भाई बलराम ने अपनी ईमानदारी का परिचय देकर अपना ही नही सम्पूर्ण रेलवे , अपने माता पिता और देश का गौरव  बढ़ाया हैं, ये भाई हमारे साथ ही DMW/पटियाला में कार्यरत हैं और अलवर जिले के राजगढ़ में #कटहैडा गांव के रहने वाले है
अपनी छोटी सी नोकरी से खुश रहने वाले भाई बलराम के चेहरे पर बड़ी खुशी हैं कि वे उस समान को उसके मालिक तक पहुँचा पा रहे है.... हम सबको उनपे गर्व है और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हैं... साथ ही आप से अनुरोध करेंगे कि रेलवे का सम्मान बढ़ाने वाले इस भाई की पोस्ट को शेयर करके उनका हौसलाफजाई जरूर करें।