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एक JanNayak,जिसके बिना हम सब अधूरे हैं


बचपन से सुनते समझते आये हैं क़ि घर को अच्छे से चलाने के लिए जरुरी हैं क़ि घर का मुखिया जिम्मेदार और समझदार हो साथ ही उस परिवार के सभी लोगो को चाहिए कि वे भी सब मिलकर उसका सहयोग करे जिससे परिवार मिलजुलकर ख़ुशहाल रहे।
ऊपर के इन शब्दों में ही एकजुट समाज का पूरा रहस्य छुपा हुआ हैं, जिसे हर आम व्यक्ति आसानी से समझता और जानता हैं, तभी तो हर देश, संस्था, पार्टी को चलाने के लिए एक मुखिया की जरुरत हमेशा से महूसस होती आ रही हैं और जिस समाज, देश को जब एक सुयोग्य नायक मिल जाता हैं, तो वह उस नायक के साथ चलकर विकास की राह पर निकल पड़ता हैं।
तो क्या अभी तक हमारे मीणा समाज में ऐसा अभी तक कोई जननायक पैदा ही नहीं हुआ, जिसके साथ हमारा पूरा समाज खड़ा हो सके या फिर कही ऐसा तो नहीं हैं क़ि हम समाज के अंदर छुपे हुये चन्द दलालों के गुमराह करने की वजह से हम उसे पहचान नहीं पा रहे हो। वैसे भी इस दुनिया का ये दस्तूर रहा हैं क़ि यहाँ सच्चे लोगो की कद्र उनके गुजर जाने के बाद की जाती हैं, जबकि हम सब ये अच्छी तरह जानते समझते हैं क़ि वक्त हमें समय समय पर जननायक को पहचानने का मौका देता रहता हैं, और सृष्टि के बार बार अहसास कराने के बाद भी हम उसे नहीं पहचान पाते हैं, तो ये हमारे समाज की एक विडम्बना ही कही जाएगी।
        एक बार फिर ऐसा ही मौका था किहम सब उस जननायक को पहचाने,जितना उसने अपने समाज और देश का नाम ऊँचा किया हैं, तो क्या हम सब उसका साथ नहीं दे सकते। और हाल ही में करीरी में भैरों बाबा के लख्खी मेले एक बार फिर ये देखने को मिला कि समाज का हर आम आदमी सिर्फ और सिर्फ डॉ किरोड़ी लाल को ही अपना जननायक मानती हैं, ऐसा नज़ारा कोई पहली बार नहीं देखा था हमने, 02 अक्टूबर की रैली को याद करलो चाहें दो साल पहले हुई मानसरोवर की सभा ,और ना जाने कितने ही मौके आये तब हमने ही नहीं, सारी दुनिया ने ये बोला, यदि राजस्थान मे कोई सबसे बड़े जनाधार वाला नेता हैं तो वह हैं- जननायक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा. अब तक डॉ किरोड़ीलाल राजस्थान आदिवासी समाज का इकलौता ऐसा नेता हैं जिसके फ़ोटो को IndiaToday ने अपना कवर फ़ोटो बनाया था।
         इतना सब होने के बाद भी हम कहा पिछड़ जाते हैं हर बार, क्यों ना मिल पाता हैं हमारे समाज को सरकार मे वो हक़, जिसके हम हकदार हैं, क्यों ना दे पा पाये हम अब राजस्थान को एक किसान मुख्यमंत्री, इसके लिए हमें दुनिया की कमी देखने और गिनाने की जरुरत नहीं हैं, जरुरत हैं तो अपने ख़ुद के घर में मंथन करने की, आगे मै अपने शब्दों इस मुद्दे पर मंथन कर रहा हूं, हो सकता हैं क़ि आप इससे सहमत हो या नहीं, लेकिन खुले दिल से अपने विचार जरूर रखना, ऐसा मेरा आप सब से विन्रम निवेदन है।

1. आजादी के वक्त से हमारे समाज में ये मिथक पैदा हो गया था, कि सरकारी सेवायों से रिटायरमेंट होने वाले अच्छे काम करा सकते हैं, जिसके पीछे जनमन में ये आधार बन गया था क़ि इनके पास खूब पैसे होते हैं और सरकारी पदों  पर रहने से इनकी अच्छी जानकारी भी होती तो ये सबके काम करवा सकते हैं, और कई परिवारों ने इसी लाइन पर चल अब तक समाज पर कब्ज़ा करके रखा हैं, लेकिन उनसे बदले मे सिर्फ चापलूसी ही मिली हैं ।
2. जब जब इन 60 साल के रेटियार बुजर्गो के महल को तोड़ने के लिए किसी युवा ने राजनीति में आने की कोशिश की, तब तब ये बुज़र्ग उन युवायों को गुंडा चोर उच्चका की उपाधि दे दे कर समाज से दूर करने की कोशिश में लगे रहे और हकीकत में यही से मीणा समाज में राजनैतिक विखराब शिरु हो गया था।
3. एक दौर था जब IAS कस्टम, आईपीएस से रिटायरमेंट होने का मतलब था क़ि अब ये समाज सेवा करेगे, नेता बनेगे। लेकिन ये सोचने वाली बात थी कि जिसे 60 साल की उम्र तक समाज सेवा की याद नहीं आई और रिश्वत के घरोंदे बनाने में लगे रहे और नाती पोतों को खिलाने की उम्र में उन्हें राजनीति याद कैसे आ जाती, ऐसे में ये पक्का था क़ि उनमे राजनेता बनने का जुनून था ही नहीं वे तो बस नाम के लिए नेता बने थे,सच में ही किसी के अंदर समाज सेवा का भाव हो तो वह 60 साल तक इन्तजार कैसे कर सकता हैं?
4. और इस बुजर्गो के मिथक को तोड़ा डॉ. किरोड़ी लाल ने, जिसने राजस्थान की राजनीति में मीनायो को शीर्ष पर लाके खड़ा किया, ये डॉ किरोड़ी लाल ही थे जो डॉक्टरी पेशे को छोड़ कर युवावस्था में ही जनसेवा से जुड़ गए, सैंकड़ो जन आंदोलन किये, कई बार जेल गए और हमारे ये बुज़र्ग नेता उन्हें गुंडा कह कह कर आम लोगो को गुमराह करते रहे, लेकिन वे भूल गए थे क़ि किरोड़ी लाल का खून गर्म था, उन की तरह बुढ़ापे में राजनीति नहीं सीखी, तभी तो इस जननायक ने हार नहीं मानी और एक दिन ऐसा आया कि सारी दुनिया कहने लगी- जन जन का नेता, सर्व समाज का नेता,  डॉ किरोड़ी लाल मीणा
5.डॉ साहब के मुख्य पटल पर आ जाने से समाज के युवायों को भी राजनीति में आगे आने का मौका मिलने लगा, क्योंकि किरोड़ी लाल से मिलने के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं बस सच्चे मन की जरूरत पड़ती हैं, इससे पुराने जमे हुए नेता नाराज होने लगे और डॉ साहब की टीम को गुंडा पार्टी बता बता कर समाज में फूट डालने लगे, जबकि अब आमजन पूरी तरह डॉ साहब अपना जननायक मान चूका था। लेकिन इन पुराने दलालो ने हमेशा वोटो की वक्त धनबल के सहारे फॅसा कर कभी भी डॉ किरोड़ी लाल को वो राजनैतिक मुकाम हासिल नहीं होने दिया, जिसके वे वास्तविक रूप से हकदार हैं। हाँ एक बार जरूर 2008 के चुनावो में हमने पुरे मन से उनका साथ दिया था क्योंकि उस वक्त हम गुर्जर आंदोलन की वजह से एकजुट थे और दलालो को पहचान चुके थे, लेकिन उसके बाद जीते हुए नेताओं ने समाज को ठेंगा दिखाते हुए खुद की बोलीं लगा कर अपना जमीर लूटा दिया था।
6. अब वक्त बदल रहा हैं, डॉ साहब की उम्र भी धीरे धीरे बढ़ रही हैं, ऐसे मे, अभी भी हमारे पास मौका हैं कि हम समाज को एकजुट करे, और ये सब डॉ साहब के नेतृत्व में ही हो सकता हैं अंत हम सबको उनका साथ देकर एकजुट होने की मुहिम चलानी होगी, नए और युवा नेतायों को भी अब आगे लाना होगा। इस कड़ी में सपोटरा से रमेश जी और दौसा से मुरारी लाल जी भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं। साथ ही डॉ साहब से भी इस लेख के माध्यम से अनुरोध रहेगा कि वे राजस्थान को अब तक की सबसे अच्छी युवा टीम बना कर दे जो भविष्य में समाज की बागडौर समाल सके। और सभी पुराने नेतायों से विनती रहेगी कि वे ईगो छोड़कर समाज के साथ बैठे और आज के वक्त किरोड़ी लाल के बिना ये समाज अधूरा हैं, इस बात को हर बच्चा बच्चा मानता हैं, फिर आप भी मान जायाइये और एकजुट हो जाइये।

B Singh मोहचा
98297-38775

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