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मोहचा में एक बार फिर पूरा होगा 'बढ़ के नीचे ' बैठने का सपना

हम गांव में जब भी घर से बाहर बैठे होते हैं चोराये पर और किसी का फ़ोन आ जाये और वो पूछे कि कहाँ बैठे हुये हो तो, अकस्मात् ही हमारे मुँह से निकल जाता हैं- क़ि बड़ के नीचे

लेकिन जब गौर से देखेंगे तो पता चलेगा कि वहाँ से बड़ का पेड उखड़े तो कई साल हो गए हैं बस नाम बाक़ी रह गया हैं चोराये का
हा हम बात कर रहे हैं गोपाल सेठ के मकान के आगे होने वाले बड़ के पेड़ की जो कभी गाँव की पहचान हुआँ करता था, लेकिन वक्त के साथ वह पेड़ भी ग़ुम हो गया और उस पर बैठने वाले हज़ारो पछीयों का आशियाना भी उसी के साथ उजड़ गया था।
अब फिर से उसी जगह उसी बड़ के पेड को पुनः जीवित करने की कोशिश की हैं मोहचा विकास क्लब के सदस्यों ने, और सबके प्रयासों से गांव में 15 अगस्त के दिन उसी जगह पुनः बड़ का पेड लगाया गया हैं और आशा करते हैं आप सब के सहयोग और लगन से जल्द ही ये पेड़ छायादार हो कर फिर से गांववासियो को अपनी छाँव तले बैठने का अवसर देगा

मोविक् टीम के सहयोग से

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